Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने दो सरकारी शिक्षकों के तबादले को “दंडात्मक कार्रवाई” मानते हुए रद्द कर दिया. कोर्ट ने दंडात्मक कार्रवाई के तौर पर किसी शिक्षक के स्थानांतरण को अनुचित बताया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 का तबादला आदेश रद्द करते हुए प्रार्थियों की याचिका स्वीकार कर ली.
प्रार्थी सुशील कुमार यादव एवं अन्य देवघर के प्लस 2 शिक्षक है. उच्च शिक्षा निदेशक ने इनका स्थानांतरण दूसरे जिले में 19 जनवरी 2026 को कर दिया था. प्रार्थी सुशील कुमार यादव दिव्यांग श्रेणी में आते हैं. वहीं, श्रीकांत मंडल की पत्नी भी सरकारी शिक्षिका है इसलिए दोनों को एक ही क्षेत्र में रखने का प्रावधान है.
राज्य सरकार ने शपथ पत्र में बताया था कि इनके खिलाफ शिकायत दर्ज हुआ था जिसके आधार पर इनका स्थानांतरण किया गया है. सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि उक्त शिकायत के आधार पर इन पर कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हुई, न ही उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया था.
अचानक शिकायत के आधार पर उनका ट्रांसफर दूसरे जिले में कर दिया गया यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है. किसी कर्मी को शिकायत के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई के तहत ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है. प्रार्थियों ने रिट याचिका में 19 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें देवघर से क्रमशः बोकारो और गोड्डा स्थानांतरित किया गया था.
प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को यह भी बताया था कि तबादला आदेश भले प्रशासनिक आवश्यकता के नाम पर जारी किया गया हो, लेकिन राज्य सरकार के जवाब से स्पष्ट है कि यह कार्रवाई शिकायतों और आरोपों के आधार पर की गई, इसलिए यह दंडात्मक प्रकृति की है.
अदालत को बताया गया था कि सुशील कुमार यादव 48% दिव्यांग हैं और सरकारी नीति के अनुसार उन्हें गृह जिला में पदस्थापन का लाभ मिलना चाहिए. राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा था कि स्कूल प्रबंधन की गोपनीय शिकायत के आधार पर मामला राज्य स्तरीय स्थापना समिति के समक्ष रखा गया था.
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