Ranchi News: झारखंड हाइकोर्ट ने भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थों की बरामदगी के मामले में 10 साल की सजा पाए ट्रक मालिक सुल्तान वाहिद को जमानत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि ट्रक मालिक को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके वाहन से बड़ी संख्या में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक पदार्थ ले जाए जा रहे थे. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने सुल्तान वाहिद की ओर से दाखिल जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.
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अदालत ने पाया कि आरोपी को Explosive Substance Act की धारा 4(i) और 5(a) के तहत दोषी ठहराया गया है और दोनों धाराओं में 10-10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गयी है.
मामले के अनुसार पुलिस ने एक ट्रक को रोककर तलाशी ली थी. तलाशी के दौरान ट्रक से बड़ी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए थे. ट्रक के चालक और खलासी को मौके पर पकड़ा गया था. अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गयी कि वह ट्रक में मौजूद नहीं था और केवल ट्रक का मालिक होने के कारण उसे मामले में आरोपी बनाया गया है. यह भी कहा गया कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके ट्रक का इस्तेमाल विस्फोटक पदार्थों के परिवहन में किया जा रहा है.
अदालत ने यह भी कहा कि ट्रक से भारी मात्रा में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए थे. ऐसे में यह कहना कि ट्रक मालिक को इसकी जानकारी नहीं थी, स्वीकार्य नहीं है. इसके अलावा, अभियुक्त ने अपने धारा 313 सीआरपीसी के बयान में ट्रक के स्वामित्व से संबंधित आपत्तिजनक परिस्थितियों के बारे में पूछे जाने पर ट्रक का मालिक होने से ही पूरी तरह इनकार कर दिया था.
इन परिस्थितियों को देखते हुए खंडपीठ ने कहा कि वह अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने के पक्ष में नहीं है. अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी . यहां बता दे कि यह मामला दुमका के काठीकुंड कांड संख्या 45/ 2016 से जुड़ा है.
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