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हजारीबाग वन भूमि घोटाला: राजस्व कर्मचारी की अग्रिम जमानत याचिका HC से खारिज

  • गैर मजरूआ खास जमीन का हो गया म्यूटेशन
  • तत्कालीन राजस्व कर्मचारी संतोष वर्मा पर आरोप
  • संतोष ने कहा IAS विनय चौबे ने रिपोर्ट बदलने का बनाया दबाव
  • रिपोर्ट बदलने से इनकार करने पर हुई ट्रांस्फर
  • मूल म्यूटेशन रिकॉर्ड अभी भी गायब

Ranchi: हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में आरोपी राजस्व कर्मचारी संतोष कुमार वर्मा को झारखंड हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है. हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की कोर्ट ने संतोष कुमार वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. आरोप है कि सरकारी भूमि को साजिशपूर्वक निजी व्यक्तियों (विनय कुमार सिंह एवं स्निग्धा सिंह) के नाम म्यूटेशन कर दिया गया. मामले में याचिकाकर्ता ने कहा कि वह उस समय राजस्व कर्मचारी था. म्यूटेशन आदेश एक फर्जी रिपोर्ट पर आधारित था, जिस पर उसके हस्ताक्षर नहीं थे. उसने मूल रूप से म्यूटेशन का विरोध किया था. तत्कालीन उपायुक्त बिनय कुमार चौबे ने रिपोर्ट बदलने का दबाव बनाया. इंकार करने पर उसका स्थानांतरण 22.06.2010 को कर दिया गया. म्यूटेशन रिकॉर्ड गायब हैं और RTI के माध्यम से भी उन्हें दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए. म्यूटेशन आदेश उसके स्थानांतरण के बाद पारित हुआ.

 

 

कोर्ट ने क्या कहा

 

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में अभी जांच जारी है और मूल म्यूटेशन रिकॉर्ड अभी भी गायब है. याचिकाकर्ता बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद जांच में उपस्थित नहीं हुआ. प्रतिशपथ पत्र में उसके विरुद्ध कुछ सामग्री प्रस्तुत की गई है. सह-आरोपी के बयान में भी उसका नाम आया है. इन परिस्थितियों में वह अग्रिम जमानत का विशेषाधिकार पाने का अधिकारी नहीं है.

 

ACB ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया. उनकी ओर से कहा गया कि बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि को साजिश के तहत निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज किया गया. भूमि माफिया और तत्कालीन सर्किल कार्यालय कर्मियों की मिलीभगत थी. संबंधित खाता नंबर का रिकॉर्ड नष्ट/गायब पाया गया. याचिकाकर्ता को कई बार नोटिस भेजे गए लेकिन वह जांच में उपस्थित नहीं हुआ. अन्य म्यूटेशन मामलों (485, 486, 487, 488/2010-11) में उसके हस्ताक्षर पाए गए. सह-आरोपी अलका कुमारी के बयान (धारा 183 BNSS) में भी उसकी संलिप्तता बताई गई. उसके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति संबंधी प्रारंभिक जांच भी चल रही है.

 


क्या है मामला

 

आरोप है कि विनय कुमार सिंह ने हजारीबाग में 28 डिसमिल गैर मजरूआ खास जंगल झाड़ की  सरकारी जमीन की खरीद की थी और इसका सरकारी अधिकारियों की मिली भगत से गलत तरीके से म्यूटेशन भी करा लिया था. राज्य राजस्व कर्मचारी संतोष कुमार वर्मा ने इस जमीन के प्रतिबंधित सूची में होने और वन भूमि होने के बावजूद भी इस जमीन के बारे में गलत रिपोर्ट सर्किल अफसर (CO )को दी थी. इस जमीन के प्रतिबंधित सूची में होने और वन भूमि होने का दस्तावेज भी उनके पास था लेकिन उसे उन्होंने सर्किल अफसर को उपलब्ध नहीं कराया था.इसके बाद एसीबी ने मामले में केस दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया है. मामले में हजारीबाग एसीबी कांड संख्या 11/2025 दर्ज किया गया है. मामले में IAS विनय चौबे एवं नेक्सजेन के संचालक विनय कुमार सिंह, उनकी पत्नी भी आरोपी है.

 

 

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