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HC ने CSIR के डायरेक्टर को फटकारा, पूछा-6 माह में रिटायर कर्मी का हाउस रेंट 1 लाख से 16 लाख कैसे हो गया?

झारखंड हाईकोर्ट ने CSIR (सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च) के सेवानिवृत्त कर्मी का हाउस रेंट 6 माह में  एक लाख से बढ़कर 16 लाख हो जाने को गंभीरता से लिया. कोर्ट ने मामले में CSIR के डायरेक्टर को फटकार लगाई और पूछा कि हाउस रेंट का पैसा इतना कैसे बढ़ गया?
 
  • सेवानिवृत्त कर्मी के हाउस रेंट को पुर्नमूल्यांकन कर नए सिरे से गणना करें
  • अगली सुनवाई में CSIR के सेक्शन ऑफिसर और एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर को हाजिर रहने का निर्देश

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने CSIR (सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च) के सेवानिवृत्त कर्मी का हाउस रेंट 6 माह में एक लाख से बढ़कर 16 लाख हो जाने को गंभीरता से लिया. कोर्ट ने मामले में CSIR के डायरेक्टर को फटकार लगाई और पूछा कि हाउस रेंट का पैसा 6 महीने में इतना कैसे बढ़ गया?

 

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने CSIR के डायरेक्टर को निर्देश दिया कि वह रिटायर कर्मी गोपाल चंद्र लोहार के हाउस रेंट के 16 लाख के बिल का पुर्नमूल्यांकन कर नए सिरे से गणना करें.

 

इससे पहले कोर्ट के आदेश के आलोक में CSIR के डायरेक्टर  सहित CSIR के सेक्शन ऑफिसर और एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर कोर्ट में हाजिर हुए थे. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 मई निर्धारित की है.

 

कोर्ट ने CSIR के डायरेक्टर को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने की छूट दी है. लेकिन CSIR के सेक्शन ऑफिसर और  एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर कोर्ट में अगली सुनवाई में हाजिर रहने को कहा है. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद सिन्हा ने पक्ष रखा. 

 

क्या है मामला 

दरअसल प्रार्थी गोपाल चंद्र लोहार वर्ष 1989 में CSIR, धनबाद में टेक्नीशियन पद पर नियुक्त हुए थे. वह 31 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत हो गए थे. करीब आठ माह तक उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान भी नहीं किया गया था.

 

कंपनी की ओर से उन्हें एक पत्र दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि अब सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें कंपनी से मिले घर का रेंट 9995 प्रति माह देना होगा. 17 अप्रैल 2023 को उन्हें कंपनी की ओर से उनके घर का बिल करीब 1 लाख 6 हजार 403 बताया गया.

 

नवंबर 2023 को प्रार्थी ने अपना घर खाली कर दिया. लेकिन उनके कंपनी वाले घर रेंट का बिल 16 लाख 11 हजार 163 रुपए बताया गया. प्रार्थी का कहना था कि इतनी बड़ी राशि उनके ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट मद के पैसे, जो करीब 23 लाख कंपनी के पास बकाया पड़े हैं, उसमें से 16 लाख रुपए काट लेने की साजिश की जा रही है. 

 

बता दें कि 16 लाख रुपए हाउस रेंट का बिल आने पर प्रार्थी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. मामले में 17 अप्रैल को कोर्ट ने CSIR के डायरेक्टर, सेक्शन ऑफिसर और एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर को कोर्ट में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया था.

 

ट्रिब्यूनल के आदेश पर कोर्ट ने उठाया सवाल

प्रार्थी गोपाल चंद्र लोहार ने सरकारी क्वार्टर का किराया/दंडात्मक शुल्क की गणना को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उनका कहना है कि ट्रिब्यूनल (प्रथम न्यायालय) ने बिना उचित कारण बताए याचिका को खारिज कर दिया और आदेश काफी संक्षिप्त (cryptic) है.

 

पहले 17 अप्रैल 2023 में बकाया राशि 1,06,403 बताई गई थी, जो कथित रूप से 31 मार्च 2023 तक क्वार्टर खाली करने की स्थिति में देय थी. बाद में 22 अप्रैल 2024 को यही राशि बढ़ाकर 16,11,163  रुपए कर दी गई.

 

जिस पर 17 अप्रैल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि दोनों गणनाओं में बड़ा अंतर है और यह स्पष्ट नहीं है कि इतना बदलाव कैसे किया गया. पहले की गणना प्रशासनिक अधिकारी द्वारा की गई थी. जबकि बाद की गणना उससे निम्न स्तर के सेक्शन ऑफिसर ने की. ट्रिब्यूनल ने बिना जवाब मांगे ही मामला निपटा दिया, जो उचित नहीं लगता.

 

 

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