Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो स्टील प्लांट (SAIL/BSL) से जुड़े ग्रैच्युटी विवाद में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने अपना सरकारी क्वार्टर खाली कर दिया है, उनसे ग्रैच्युटी की कथित अतिरिक्त राशि वापस नहीं ली जा सकती. यह आदेश सेल की बोकारो स्टील प्लांट इकाई और केंद्र सरकार की अपील (एल.पी.ए.) पर मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने दिया.
क्या है मामला
मामले में बोकारो स्टील लिमिटेड के 11 कर्मचारियों ने अपनी ग्रैच्युटी के लिए याचिका दायर की थी. कंपनी का कहना था कि कुछ कर्मचारियों को ग्रैच्युटी में अधिक राशि दे दी गई है, जिसे वसूला जाना चाहिए. हालांकि अदालत के सामने कंपनी ने स्वीकार किया कि 11 में से 10 सेवानिवृत्ति कर्मचारी अपना क्वार्टर खाली कर चुके हैं और 9 को ग्रैच्युटी का भुगतान पहले ही कर दिया गया है.
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बीरेंद्र प्रसाद ओझा को राहत
कंपनी ने आठवें प्रतिवादी बीरेंद्र प्रसाद ओझा से 1,21,392 रुपये की अतिरिक्त राशि वसूलने की मांग की थी. लेकिन हाईकोर्ट ने कंपनी के इस बयान को देखते हुए कहा कि चूंकि ओझा ने क्वार्टर खाली कर दिया है और कंपनी वसूली पर जोर नहीं दे रही, इसलिए उनसे यह राशि वापस नहीं ली जाएगी.
राधाकांत झा के लिए शर्त
सातवें प्रतिवादी राधाकांत झा अभी तक अपना सरकारी क्वार्टर खाली नहीं कर पाए हैं. कोर्ट ने कंपनी को अनुमति दी है कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें क्वार्टर से बेदखल करने के लिए आवश्यक कदम उठाए. हालांकि क्वार्टर खाली करने और कब्जा सौंपने के बाद कंपनी को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के Management of SAIL vs. Shambhu Prasad Singh फैसले के अनुसार, ग्रैच्युटी का भुगतान करना होगा.
खंडपीठ ने निर्देश दिया कि क्वार्टर खाली कर चुके कर्मचारियों से पहले से दी गई ग्रैच्युटी वापस नहीं ली जाएगी. बीरेंद्र प्रसाद ओझा से 1,21,392 रुपये की वसूली नहीं होगी. राधा कांत झा को क्वार्टर खाली करने के बाद ग्रैच्युटी देनी होगी. कोर्ट ने इस अपील को बिना किसी लागत के निपटाई गई और लंबित आवेदन भी निष्पादित कर दिया.
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