Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामूली सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले में पुलिस कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताते हुए दोनों एफआईआर की जांच पर रोक लगा दी है.
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता मनोज टंडन के खिलाफ कोई भी दबावपूर्ण या पीड़क कार्रवाई नहीं की जाएगी. याचिकाकर्ता ने डोरंडा थाने में दर्ज दो मामले की सीबीआई जांच करने का आग्रह किया है.
मामले में कोर्ट ने कहा कि यदि एक ही घटना से जुड़े दो मामले हों, तो दोनों की जांच सामान्यतः एक ही जांच अधिकारी द्वारा होनी चाहिए. कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले के दोनों एफआईआर की आगे की जांच और कार्यवाही पर रोक रहेगी.
याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई coercive कदम नहीं उठाया जाएगा. SSP रांची स्थिति पर नजर रखेंगे और याचिकाकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी और जांच में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है. अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी.
क्या है मामला
याचिकाकर्ता मनोज टंडन ने अदालत में बताया कि 17 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट आते समय उनकी कार हल्के रूप से एक बाइक से टकरा गई थी. इसके बाद पुलिस ने उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक थाना में बैठाए रखा और कार को कब्जे में ले लिया, जबकि अब तक विधिवत सीजर मेमो भी तैयार नहीं किया गया था.
मीडिया ट्रायल और सांप्रदायिक रंग देने का आरोप
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि पुलिस द्वारा इस छोटे से मामले में मीडिया ट्रायल कराया जा रहा है. साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा घर और थाना को घेरने की स्थिति उत्पन्न हुई.
याचिकाकर्ता ने यह भी आशंका जताई कि पुलिस उन्हें कभी भी हिरासत में ले सकती है, जबकि BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस देना आवश्यक है.
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