Ranchi: बंधुआ मजदूरों को सरकारी लाभ और मुआवजा दिलाने को लेकर दाखिल घनश्याम पाठक की याचिका की सुनाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत मुक्त कराए गए मजदूरों को तत्काल मुआवजा, पुनर्वास और अन्य सरकारी सुविधाएं देने का कानूनी प्रावधान है. लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने गढ़वा समेत राज्य के अन्य जिलों में मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने पर नाराजगी जताई. मौखिक कहा कि बंधुआ मजदूरों को सरकारी लाभ दिया जाना चाहिए. इसे लेकर सरकार को संवेदनशील होना चाहिए.
सरकार द्वारा दाखिल जवाब को पूरी तरह संतोषजनक नहीं माना. कोर्ट ने 14 मई को गढ़वा के वर्तमान और पूर्व उपायुक्त को तलब किया है. इससे पूर्व सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर मजदूरों को सरकारी लाभ दिलाने की योजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है.
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