- सभी आरोपियों को मिली थी उम्र कैद की सजा
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में सजा के खिलाफ दो अलग-अलग अपील पर फैसला सुनाया है. एक अपील में मृतका की सास सहित तीन रिश्तेदारों को बरी कर दिया, जबकि दूसरे अपील में मृतका के ससुर को बरी किया और पति साजिद मियां की सजा को बरकरार रखा है.
लातेहार की निचली अदालत ने पति साजिद मियां और ससुर आमिर मियां को 9 जुलाई 2004 को IPC की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराया था और उम्र कैद की सजा सुनाई थी. जबकि बाकी तीनों आरोपियों (शमीम मियां, रशीदा बीबी, सकुरन बीबी) को 24 मार्च 2006 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय एवं न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने फैसला सुनाया है.
क्या है हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में शमीम मियां, रशीदा बीबी, सकुरन बीबी को बरी कर उनकी सजा और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया. इन तीनों के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं था, केवल रिश्तेदार होने के आधार पर दोषी ठहराया गया था.
इन तीनों को रिहा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि केवल रिश्तेदारी के आधार पर किसी को हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य न हों. वहीं मृतका के ससुर को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया.
क्या था मामला
यह मामला वर्ष 2002 में लातेहार जिले का है, जहां सैरून बीबी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. मृतका के पिता ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी को पति और ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया जाता था क्योंकि उसने दो बेटियों को जन्म दिया था.
घटना के अनुसार, 14 मई 2002 को सैरून बीबी की हत्या कर दी गई और उसका शव पेड़ के नीचे बैठी अवस्था में गले में कपड़ा बंधा मिला. इस आधार पर मनिका थाना कांड संख्या 20/2002 दर्ज किया गया.
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