Ranchi: झारखंड में स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर राज्य सरकार अब केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ठोस कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है.15वें वित्त आयोग और पीएम-अभीम योजना के तहत निर्माण और व्यय की धीमी प्रगति को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है.
पिछली बैठक में मिली थी चेतावनी
बीते 2 फरवरी को अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग अजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों के साथ समीक्षा बैठक की थी. जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना, 15वां वित्त आयोग और पीएम-अभीम योजना की प्रगति की गहन समीक्षा की गई थी. बैठक के दौरान धीमी कार्य प्रगति पर सभी सिविल सर्जनों को चेतावनी दी थी.
तेजी लाने के लिए नया कदम
6 फरवरी यानी शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सभी जिलों के उप विकास आयुक्तों के साथ अलग से समीक्षा बैठक की. इस बैठक में 15वें वित्त आयोग और पीएम-अभीम योजना के तहत हो रहे निर्माण कार्यों और खर्च की स्थिति पर चर्चा की गई. एचएससी, पीएचसी, बीपीएचयू, आईपीएच और यूएएम जैसी स्वास्थ्य इकाइयों के निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए, अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जहां भी कार्य बाधित हैं. वहां तत्काल कारणों की पहचान कर निर्माण कार्य को पूरा कराया जाए.
निर्माण कार्य पूरा, लेकिन चालू नहीं
बैठक में यह भी सवाल उठाया गया कि कई स्थानों पर स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण पूरा होने के बावजूद वे चालू क्यों नहीं हो पा रहे हैं. ऐसे सभी मामलों में तुरंत स्थिति का आकलन कर केंद्रों को फंक्शनल बनाने का निर्देश दिया गया. साथ ही विभिन्न योजनाओं में उपलब्ध राशि को शीघ्र खर्च कर विकास कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया.
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, उप सचिव ध्रुव प्रसाद और केपीएमजी के लालमोहन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे.
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