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Health News : झारखंड में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का सपना अधूरा, 4 करोड़ की अड़चन बनी रोड़ा

रांची के सदर अस्पताल परिसर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट बनाने की तैयारी तो हो गई, लेकिन पैसों की कमी पूरी योजना में रोड़े अटका रही है. टेंडर निकालने पर इस परियोजना के लिए 10.8 करोड़ रुपये की बोली आई, जबकि सरकार ने सिर्फ 7 करोड़ रुपये मंजूर किए थे.
 
सदर अस्पताल, रांची में लगनी है बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट.

Ranchi : झारखंड के गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राज्य में ही इलाज मिलने की उम्मीद फिलहाल टूटती दिख रही है. रांची के सदर अस्पताल परिसर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट बनाने की तैयारी तो हो गई, लेकिन पैसों की कमी पूरी योजना में रोड़े अटका रही है.

 

टेंडर निकालने पर इस परियोजना के लिए 10.8 करोड़ रुपये की बोली आई, जबकि सरकार ने सिर्फ 7 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. यानी करीब 4 करोड़ रुपये की कमी सामने आई. अब स्वास्थ्य विभाग ने दोबारा प्रस्ताव मांगा है, जिससे इस यूनिट का भविष्य अनिश्चित हो गया है.

 

मरीजों की मुसीबत

झारखंड में यह सुविधा न होने के कारण मरीजों को दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, वेल्लोर और हैदराबाद जैसे शहरों में जाना पड़ता है. वहां इस इलाज पर 15 लाख से 40 लाख रुपये या उससे भी ज्यादा खर्च होते हैं, ऊपर से रहने और दवाओं का बोझ अलग. 

 

किन मरीजों को है जरूरत

झारखंड में सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया के मरीज बड़ी संख्या में हैं. इसके अलावा ब्लड कैंसर, लिम्फोमा और एप्लास्टिक एनीमिया जैसी बीमारियों में भी बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र स्थायी इलाज होता है.

 

क्यों है यह इतना महंगा

बोन मैरो ट्रांसप्लांट में मरीज की खराब अस्थि मज्जा की जगह स्वस्थ स्टेम सेल्स लगाई जाती हैं. यह बेहद जटिल प्रक्रिया है जिसमें प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और आधुनिक लैब की जरूरत होती है. संक्रमण से बचाव इसका सबसे अहम हिस्सा है, जो लागत को और बढ़ा देता है.

 

जगह तय हो चुकी है, बस फंड का इंतजार

अस्पताल परिसर में जगह की पहचान हो चुकी है और कई बैठकें भी हो चुकी हैं. लेकिन अतिरिक्त 4 करोड़ रुपये के इंतजार में यह पूरी योजना ठहरी हुई है.

 


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