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आज झारखंड के लिए गौरव का दिन, गुरुजी को मरणोपरांत मिलेगा पद्मभूषण, उनकी पत्नी ग्रहण करेंगी सम्मान

शिबू सोरेन को यह सम्मान आदिवासी अधिकारों की लड़ाई, जनसेवा और अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में उनके योगदान के लिए दिया जा रहा है. इसे पूरे झारखंड के गौरव के रूप में देखा जा रहा है.
 

Ranchi : झारखंड आंदोलन के प्रखर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन (गुरुजी) को आज मरणोपरांत पद्मभूषण से नवाजा जाएगा. राष्ट्रपति भवन में होने वाले समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू यह सम्मान देंगी. गुरुजी की पत्नी रूपी सोरेन उनकी तरफ से यह सम्मान ग्रहण करेंगी.

 

पद्मभूषण देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है. शिबू सोरेन को यह सम्मान आदिवासी अधिकारों की लड़ाई, जनसेवा और अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में उनके योगदान के लिए दिया जा रहा है. इसे पूरे झारखंड के गौरव के रूप में देखा जा रहा है.

 

भारत रत्न की मांग

केंद्र सरकार ने इस साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यह घोषणा की थी. इससे पहले कई संगठन और राजनीतिक दल उन्हें भारत रत्न देने की मांग कर चुके थे. झारखंड विधानसभा ने भी इसका प्रस्ताव पारित किया था.

 

आदिवासी समाज को एकजुट किया

दिशोम गुरु व गुरुजी के नाम से मशहूर शिबू सोरेन ने महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन चलाया और आदिवासी समाज को एकजुट किया. धनकटनी आंदोलन व नशामुक्ति अभियानों के जरिए उन्होंने समाज में जागरूकता फैलाई. 1970 से 1975 के बीच उन्होंने आदिवासी युवाओं के लिए रात्रि विद्यालय भी चलाए, जिससे लोग उन्हें प्यार से गुरुजी कहने लगे.

 

राजनीतिक सफर

शिबू सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की और अलग झारखंड की मांग को जन आंदोलन बनाया. वे कई बार दुमका से लोकसभा सांसद चुने गए. झारखंड के मुख्यमंत्री और कोयला मंत्री के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई.

 

81 साल की उम्र में निधन

4 अगस्त 2025 को 81 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद गुरुजी का निधन हो गया था. यह सम्मान उनके पूरे संघर्ष और झारखंड निर्माण में उनकी भूमिका की राष्ट्रीय पहचान है.

 


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