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Health News: सर्वाइकल कैंसर से बचाव की मजबूत ढाल एचपीवी वैक्सीन

ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) एक सामान्य वायरस है, जो मुख्य रूप से त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से फैलता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस वायरस के 200 से अधिक प्रकार हैं, जिनमें कुछ प्रकार महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ गले, मुंह और गुदा के कैंसर का कारण बन सकते हैं. वहीं कुछ प्रकार जननांगों में मस्से (वार्ट्स) भी पैदा करते हैं.
 

Ranchi: ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) एक सामान्य वायरस है, जो मुख्य रूप से त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से फैलता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस वायरस के 200 से अधिक प्रकार हैं, जिनमें कुछ प्रकार महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ गले, मुंह और गुदा के कैंसर का कारण बन सकते हैं. वहीं कुछ प्रकार जननांगों में मस्से (वार्ट्स) भी पैदा करते हैं.

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एचपीवी संक्रमण से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है. सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार एचपीवी टाइप-16 और टाइप-18 से बचाव में यह वैक्सीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. वर्तमान में गार्डासिल, सर्वेरिक्स और भारत में विकसित सर्वावैक जैसी वैक्सीन उपलब्ध हैं.

 

विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी वैक्सीन केवल लड़कियों के लिए ही नहीं, बल्कि लड़कों के लिए भी लाभकारी है. इससे गले और गुदा से जुड़े कैंसर का खतरा कम होता है और संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी मदद मिलती है. व्यापक टीकाकरण से सामुदायिक स्तर पर सुरक्षा यानी हर्ड इम्युनिटी विकसित होती है.

 

डॉक्टरों का कहना है कि 9 से 14 वर्ष की आयु में एचपीवी वैक्सीन की दो डोज सबसे अधिक प्रभावी मानी जाती हैं, क्योंकि इस उम्र में वायरस के संपर्क में आने से पहले शरीर में प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है. वहीं 15 से 26 वर्ष की आयु के लोगों को सामान्यतः तीन डोज दी जाती हैं.

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एचपीवी वैक्सीन लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करती है और अब तक के अध्ययनों में 10 से 15 वर्ष या उससे अधिक समय तक प्रभावी सुरक्षा के प्रमाण मिले हैं. फिलहाल नियमित बूस्टर डोज की आवश्यकता नहीं मानी जाती.

 

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि वैक्सीन लेने के बाद भी महिलाओं को नियमित जांच करानी चाहिए. 30 वर्ष की आयु के बाद हर 3 से 5 वर्ष में पैप स्मीयर या एचपीवी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वैक्सीन वायरस के सभी प्रकारों से सुरक्षा नहीं देती.

 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि एचपीवी वैक्सीन के संबंध में किसी भी निर्णय से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें. विशेष रूप से एलर्जी, गर्भावस्था या प्रतिरक्षा संबंधी समस्याओं की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही टीकाकरण कराया जाना चाहिए.

 

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