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JET 2024 में लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस विषयों को शामिल करने मामले में HC में सुनवाई पूरी, आदेश सुरक्षित

  • याचिकाकर्ता को 20 अप्रैल तक लिखित बहस प्रस्तुत करने का निर्देश

Ranchi:  झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (JET) 2024 में लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस (LIS) तथा फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (PES) विषयों को शामिल करने संबंधी याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने  याचिकाकर्ता को सोमवार तक लिखित बहस प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और निर्णय सुरक्षित रख लिया. अगली सुनवाई 12 जून को होगी.

 

याचिकाकर्ता की ओर से UGC विनियमों (राज्य झारखंड द्वारा अंगीकृत) का संदर्भ देते हुए यह प्रस्तुत किया गया कि विनियम 4.1 सामान्य शैक्षणिक विषयों जैसे विज्ञान, वाणिज्य, कला, मानविकी आदि से संबंधित है, जिनमें सहायक प्राध्यापक के पदों के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातकोत्तर डिग्री के साथ NET/JET निर्धारित है. इसके अतिरिक्त विनियम 4.2 से 4.4 क्रमशः प्रदर्शन कलाओं, नाट्य एवं योग जैसे विषयों से संबंधित हैं, जिनमें भी NET/JET की अनिवार्यता है.

 

यह भी बताया गया कि विनियम 4.5 एवं 4.6 (ऑक्यूपेशनल थेरेपी एवं फिजियोथेरेपी) ऐसे अपवाद हैं, जहां NET/JET की अनिवार्यता नहीं है. वहीं, विनियम 4.7 एवं 4.8 विशेष रूप से लाइब्रेरी साइंस तथा फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स से संबंधित हैं, जिनमें भी न्यूनतम योग्यता के रूप में NET/JET अनिवार्य है. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि JET परीक्षा में शामिल विषयों का चयन वस्तुतः उन्हीं विषयों से किया गया है, जिनमें NET/JET की अनिवार्यता है, जबकि जिन विषयों में यह अनिवार्यता नहीं है, उन्हें शामिल नहीं किया गया है.

 

बताया गया कि LIS एवं PES ऐसे विषय हैं, जिनमें NET/JET अनिवार्य है, फिर भी उन्हें विषय सूची से बाहर रखा गया है, जबकि अन्य विषय (जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री, चीनी, स्पेनिश, फ्रेंच आदि), जो कि विनियम 4.1 से 4.4 के अंतर्गत आते हैं, को शामिल किया गया है.

 

दरअसल, 26 सितंबर 2025 को कोर्ट ने राज्य से यह स्पष्ट करने को कहा था कि लाइब्रेरी साइंस विषय को JET की विषय सूची में क्यों शामिल नहीं किया गया है. इस प्रश्न के उत्तर में राज्य की ओर से पूर्व में यह कहा गया था कि लाइब्रेरियन पदों के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण विषय को शामिल नहीं किया गया. वहीं, वर्तमान सुनवाई में राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि JET परीक्षा मुख्यतः शिक्षण पदों के लिए है तथा लाइब्रेरियन पद गैर-शिक्षण प्रकृति के हैं.

 

वहीं, याचिकाकर्ता ने बताया कि सरकार द्वारा दिए गए ये कारण परस्पर भिन्न हैं और तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं, जिसे अभिलेख पर उपलब्ध सरकारी संकल्पों/दस्तावेजों के आधार पर प्रदर्शित किया जा सकता है. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि वे किसी विशेषाधिकार की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल समानता (Parity) की मांग कर रहे हैं.

 

राज्य की ओर से यह प्रस्तुत किया गया कि JET में विषयों का चयन एक नीतिगत निर्णय है और इसमें हस्तक्षेप करना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है. विषयों को शामिल करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर निर्णय एवं आवश्यक संशोधन की आवश्यकता होती है.

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