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सुप्रीम कोर्ट में बिहार SIR पर सुनवाई, कहा, आधारकार्ड  नागरिकता का प्रमाण नहीं, चुनाव आयोग के रुख को सही करार दिया

 New Delhi :  बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन(SIR) को लेकर आज मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.   जस्टिस सूर्यकांत ने SIR पर चुनाव आयोग के रुख को सही करार देते हुए कहा कि आधारकार्ड  को नागरिकता के निर्णायक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता,  इसका सत्यापित होना जरूरी है.

 

 

सुनवाई के क्रम में जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि पहले आप यह स्पष्ट करें कि एसआईआर प्रक्रिया कानून के अनुसार है या नहीं. हमें बतायें कि ऐसी प्रक्रिया चुनाव आयोग जारी कर सकता या नहीं?  अगर आप(याचिकाकर्ता) कहते हैं कि ऐसी प्रक्रिया(SIR) सशर्त योजना के तहत मंजूर है, तो हम प्रक्रिया पर विचार कर करेंगे,  अगर यह संविधान में ही नहीं है तो फिर उस हिसाब से कार्यवाही चलेगी.

 

 

याचिकाकर्ता पक्ष के एक  वकील गोपाल शंकर नारायण ने अपनी दलील रखते हुए कोर्ट को याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि अगर बड़े पैमाने पर नाम हटेंगे तो कोर्ट दखल देगा. शंकर नारायण ने कहा कि ड्राफ्ट रोल से पता चलता है कि 65 लाख लोगों के नाम काट दिये गये है, लेकिन आयोग ने इससे संबंधित कोई सूची जारी नहीं की है.

 

 

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि 7.9 करोड़ मतदाताओं में से यदि 7.24 मतदाताओं ने जवाब दिया है तो यह 65 करोड़ मतदाताओं के गायब होने के सिद्धांत को ध्वस्त कर देता है. 

 

 


वकील कपिल सिब्बल दलील दी कि जन्म प्रमाण पत्र की बात करें तो ये केवल 3.056फीसदी लोगों के पास ही है. पासपोर्ट 2.7फीसदी और 14.71 फीसदी के पास मैट्रिकुलेशन के प्रमाणपत्र है. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह साबित करने के लिए आप के कुछ तो होना ही चाहिए कि आप भारत के नागरिक हैं. कहा कि हर किसी के पास प्रमाणपत्र होता है, 

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिम खरीदने के लिए इसकी जरूरत होती है. जस्टिस ने ओबीसी/एससी/एसटी प्रमाण पत्र आदि होने का उदाहरण दिया. इस क्रम में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि बिहार भारत का हिस्सा है. अगर बिहार के लोगों के पास नहीं हैं, तो दूसरे राज्यों के लोगों क पास भी (कोई दस्तावेज़) नहीं होंगे.  

 

 

सुप्रीम कोर्ट में जीवित लोंगों को मृत बताये जाने का मुद्दा उठा. कपिल सिब्बल ने कोर्ट को जानकारी कि एक निर्वाचन क्षेत्र में 12 जीवित लोगों को मृत बताया गया है. कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने लापरवाही बरती. इस क्रम में  कोर्ट ने पूछा, वे लोग क्या अदालत में हैं? इस पर सिब्बल ने जवाब दिया कि वे अदालत में मौजूद हैं और उनमें कुछ याचिकाकर्ता हैं.  

 

 

सिब्बल ने कहा कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में नियमों के अनुसार सूची दोबारा तैयार की जानी चाहिए, आरोप लगाया कि  मसौदा जारी करने से पूर्व आयोग ने फॉर्म 4 घर-घर नहीं भेजे,  न ही दस्तावेज लिये. कपिल सिब्बल ने इसे नियम 10 और नियम 12 का उल्लंघन करार दिया.

 

 


जब चुनाव आयोग की बारी आयी तो उसके वकील राकेश द्विवेदी ने जवाब देते हुए कहा कि यह ड्राफ्ट रोल है जिन लोगों को आपत्ति है, वे आपत्ति दर्ज कर सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं. ड्राफ्ट रोल में कुछ कमियां होना स्वाभाविक है, इसलिए सुधार की प्रक्रिया और अवधि तय की गयी है. उनकी दलील थी कि इतनी बड़ी प्रक्रिया पूरी करने में कुछ न कुछ त्रुटियां तो रहेंगी ही.

 


 
जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अगर कोई जीवित व्यक्ति मृत घोषित कर दिया गया है, तो उसे अदालत में प्रस्तुत करें इस पर सिब्बल ने तर्क दिया कि यह स्थिति लगभग हर बूथ पर है.  यह संभव नहीं कि सभी को कोर्ट में लायें.  

 

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