- वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल के अनुरोध पर DGP नियुक्ति के मामले मे बुधवार को सुनवाई नहीं हुई.
Ranchi News : झारखंड के डीजीपी की नियुक्ति को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई नहीं हो पायी. सुनवाई अब अगले सोमवार (7 सितंबर) को होगी. बुधवार को मामले की सुनवाई शुरु होते ही झारखंड सरकार की तरफ से वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि Amicus Curiae की रिपोर्ट उन्हें नहीं मिली है. इसलिए वह इस मामले में कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं. उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि उन्हें Amicus Curiae की रिपोर्ट देने का आदेश दें. साथ ही मामले की सुनवाई की तिथि सोमवार या बाद की कोई तारीख निर्धारित करें. न्यायालय ने उनकी बात को स्वीकार करते हुए Amicus Curiae की रिपोर्ट उन्हें देने का निर्देश दिया. मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी मोहनन की पीठ में हुई.
18 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने DGP नियुक्ति से संबंधित आवश्यक दस्तावेज Amicus Curiae को सौंप दिया था. साथ ही उन्हें झारखंड में DGP नियुक्ति के मामले में अपनी रिपोर्ट देने का कहा था. मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त Amicus Curiae ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में क्या है. इसकी जानाकारी झारखंड सरकार को नहीं है. इसलिए झारखंड सरकार की ओर से कोर्ट में कपिल सिब्बल ने इस रिपोर्ट की मांग की.
सरकार को जारी किया गया था कारण बताओ नोटिस
प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में 18 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद मामले से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज Amicus Curiae को सौंप दिया गया था. साथ ही उन्हें झारखंड में DGP नियुक्ति मुद्दे पर अपनी राय देने को कहा था.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. सरकार से DGP की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को नहीं भेजने के मामले में जवाब देने का निर्देश दिया गया था.
SC के निर्देश से हटकर सरकार ने DGP नियुक्ति नियमावली बनाई
झारखंड मे DGP नियुक्ति का मामला लंबे समय से विवादों के घेरे में है. राज्य सरकार ने प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा DGP नियुक्ति के लिए दिये गये दिशा-निर्देश से अलग हटकर DGP नियुक्ति नियमावली बनायी है. राज्य सरकार ने DGP नियुक्ति नियमावली बनाने के लिए ब्रिटिश राज में पारित कानूनों को आधार बनाया.
DGP नियुक्ति नियमावली बनाने के लिए सरकार ने साधारण झारखंड अधिनियम 1897 की धारा 21 और पुलिस अधिनयम 1861 की धारा-2 का सहारा लिया. ब्रिटिश राज में पारित पुलिस अधिनियम में बंगाल प्रोविंस को पुलिस बल के गठन, नियुक्ति, वेतन और दंड देने के लिए नियम बनाने का अधिकार था. ब्रिटिश राज में बने इस कानून की अवधि में एकीकृत बिहार, बंगाल प्रोविंस के अधीन था.
नियम के तहत पहली नियुक्ति अनुराग गुप्ता की हुई
झारखंड सरकार ने इस कानून का सहारा लेकर “DGP का चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2024 बनाया. इस नियम के तहत राज्य में DGP के पद पर पहली नियुक्ति अनुराग गुप्ता की हुई. अनुराग गुप्ता के त्यागपत्र देने के बाद तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी इसी नियमावली के तहत की गयी.
अनुराग गुप्ता की DGP के पद पर नियुक्ति के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. बाबूलाल मरांडी ने इस नियुक्ति मामले में दो याचिकाएं दायर की थी. एक याचिका झारखंड हाईकोर्ट में और दूसरी सुप्रीम कोर्ट में. हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राज्य सरकार द्वारा बनायी गयी DGP नियुक्ति नियमावली की वैधता को चुनौती दी गयी थी.
जबकि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में DGP का चुनाव करने के लिए गठित समिति के सदस्यों के खिलाफ न्यायालय के अवमानना का मामला चलाने का अनुरोध किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने बाबूलाल की याचिका पर सुनवाई के बाद अवमानना से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी.
साथ ही DGP नियुक्ति नियमावली की वैधता की चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था. इसके बाद नियुक्ति नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

