Ranchi News: झारखंड में बढ़ती गर्मी अब सिर्फ स्वास्थ्य की समस्या नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा बन रही है.सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) की रिपोर्ट के अनुसार, 2011-12 से 2022-23 के बीच गर्मी के कारण श्रम उत्पादकता में कमी से राज्य को करीब 1.76 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ. यह इस अवधि के कुल सकल राज्य मूल्य वर्धित (जीएसवीए) का 8% है.
रिपोर्ट मंगलवार को ‘राइजिंग हीट एंड इकोनॉमिक इम्पैक्ट : टुवर्ड्स हीट रेसिलिएंट झारखंड’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में जारी की गई. अनुमान है कि 2023-24 से 2047-48 के बीच यह नुकसान बढ़कर 9.35 लाख करोड़ रुपए हो सकता है, जो अनुमानित जीएसवीए का 10.31% होगा. इसमें 4.70 लाख करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष नुकसान शामिल है.
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रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी से हुए आर्थिक नुकसान में निर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 25% रही.कृषि, वानिकी और मत्स्यपालन का योगदान 11%, परिवहन व संचार का 10%, विनिर्माण का 8% और खनन का 7% रहा.इन क्षेत्रों में कामकाज काफी हद तक श्रमिकों की शारीरिक क्षमता पर निर्भर है.
परिचर्चा में विशेषज्ञों ने जिला स्तर पर हीट एक्शन प्लान बनाने, कार्यस्थलों पर छाया, पानी और आराम की व्यवस्था करने तथा गर्मी के दौरान काम के समय में बदलाव की जरूरत बताई.सीड के सीईओ रमापति कुमार ने कहा कि जलवायु जोखिमों को विकास योजनाओं और बजट में शामिल करना जरूरी है.
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