Lagatar Desk : भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि झारखंड के छात्रों को छात्रवृत्ति से वंचित रखने वाले मुख्यमंत्री असम में एक छात्र संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे, जहां उन्होंने अपने भाषण में शालीनता और संवैधानिक मर्यादा की सभी सीमाएं पार कर दीं.
मरांडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग, राजभवन और केंद्र सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक और ओछी टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा कि जिस संविधान ने हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया है, उसी संविधान में चुनाव आयोग को मिले अधिकारों का स्पष्ट उल्लेख है, जिनके तहत SIR जैसी प्रक्रियाएं आती हैं.
झारखंड के छात्रों को छात्रवृत्ति से वंचित कर बेसहारा छोड़ने वाले मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी कल असम में एक छात्र संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे और वहां अपने भाषण में शालीनता व मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दीं। अपने संबोधन में उन्होंने चुनाव आयोग, राजभवन और केंद्र…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) February 2, 2026
राजभवन को लेकर दिए गए बयान पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जमीन घोटाले के मामले में ईडी के नोटिस की अवहेलना खुद हेमंत सोरेन ने की थी. राजभवन ने उन्हें तलब नहीं किया था, बल्कि वह खुद गिरफ्तारी से बचने के लिए आधी रात को दिल्ली से भागकर राजभवन पहुंचे थे.
मरांडी ने आरोप लगाया कि भगवान बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हो जैसे महान आदिवासी नायकों के साथ शिबू सोरेन का नाम जोड़ना इतिहास से छेड़छाड़ और आदिवासी महापुरुषों का अपमान है. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन के संघर्ष को नकारा नहीं जा सकता है. लेकिन यह भी सच है कि शिबू सोरेन रिश्वत लेकर झारखंड आंदोलन को कांग्रेस और राजद के हाथों सौंप दिया, जिनके सहारे आज हेमंत सोरेन सरकार चला रहे हैं.
बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा कि हेमंत सोरेन की सबसे बड़े आदिवासी नेता बनने की महत्वाकांक्षा भले पूरी न हुई हो, लेकिन उनकी पहचान भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रांची जमीन घोटाले में चार्जशीटेड हैं, साहिबगंज खनन घोटाले में उनकी भूमिका की जांच सीबीआई कर रही है और ऊर्जा विभाग में भी सौ करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले सामने आए हैं.
वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए मरांडी ने कहा कि नगर निकाय चुनावों में 1 अक्टूबर 2024 के बाद जुड़े युवाओं को मतदान से वंचित रखकर लोकतंत्र और संविधान का अपमान खुद हेमंत सोरेन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री वास्तव में संविधान का सम्मान करते हैं, तो अद्यतन मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने का साहस दिखाएं.
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट के अंत में कहा कि जेल जाने और सजा के डर से मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति असंतुलित हो गई है और इसी हताशा में वे लगातार अनर्गल बयान दे रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की धमकियों से न तो SIR प्रक्रिया और न ही भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई रुकेगी.
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