Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा के साथ कथित रूप से हुई जानलेवा घटना, लगातार आपराधिक धमकियों और कोर्रा थाना हजारीबाग पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. एसोसिएशन ने दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई और अधिवक्ता एवं उनके परिवार को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है.
एसोसिएशन ने अपने प्रतिवेदन में कहा है कि अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा ने वर्ष 2021 में हजारीबाग शहर की यातायात व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. प्रतिवेदन के अनुसार, इस याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने समय-समय पर हजारीबाग जिला प्रशासन की लापरवाही और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणियां की थीं. एसोसिएशन का आरोप है कि इसी के बाद से अधिवक्ता को लगातार प्रताड़ित करने और भयभीत करने का प्रयास किया जा रहा है.
इसे भी पढ़ें -
प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि अधिवक्ता के पड़ोसी प्रयाग प्रसाद महतो द्वारा उनके आवास तक जाने वाले संकरे मार्ग पर मोटर वाहन अधिनियम और अन्य वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए बुलडोजर, ट्रक और ट्रैक्टर जैसे भारी वाहनों का संचालन किया जाता रहा, जिससे उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचा. इसके अतिरिक्त 5 जुलाई 2026 की सुबह अधिवक्ता के घर की बाउंड्री पर कथित रूप से जीवित विद्युत तार रख दिया गया, जिससे उन्हें करंट लग गया और उनकी जान खतरे में पड़ गई. एसोसिएशन का दावा है कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है. प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख है कि घटना से एक दिन पूर्व 4 और 5 जुलाई को आरोपी प्रयाग महतो द्वारा अधिवक्ता श्री मिश्र को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई थी.
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि घटना के बाद अधिवक्ता मिश्रा जब लिखित शिकायत लेकर कोर्रा थाना पहुंचे तो पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया.
एडवोकेट एसोसिएशन ने अपने प्रतिवेदन में कहा है कि यह केवल एक अधिवक्ता पर हमला नहीं बल्कि न्यायिक व्यवस्था, अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और कानून के शासन पर गंभीर प्रहार है.
एसोसिएशन ने यह भी चिंता व्यक्त की कि वर्तमान परिस्थितियों में अधिवक्ता मिश्रा, उनकी लगभग 75 वर्षीय वृद्ध माता और तीन वर्षीय पुत्र की सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है.
एसोसिएशन ने डीजीपी से मांग की है कि आरोपी प्रयाग प्रसाद महतो के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराई जाए, पूरे मामले की जांच सीआईडी या किसी अन्य जिले के पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराई जाए, कोर्रा थाना प्रभारी और संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध समयबद्ध विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और अधिवक्ता एवं उनके परिवार को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment