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हाईकोर्ट ने पूछा- क्या प्रधान सचिव से ऊपर हैं रांची डीसी, अवमानना नोटिस जारी

लेबर डिपार्टमेंट में अनुकंपा पर नियुक्ति से संबंधित एक और अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने रांची डीसी सह अनुकंपा नियुक्ति समिति रांची के अध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी किया है. साथ ही रांची डीसी और प्रधान सचिव सह लेबर कमिश्नर को 5 मई को कोर्ट में सशरीर हाजिर होने का निर्देश दिया है.
 
  • 5 मई को रांची डीसी एवं प्रधान सचिव सह लेबर कमिश्नर को हाजिर होने का निर्देश

Ranchi: लेबर डिपार्टमेंट में अनुकंपा पर नियुक्ति से संबंधित एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने रांची डीसी सह अनुकंपा नियुक्ति समिति रांची के अध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी किया है. साथ ही रांची डीसी और प्रधान सचिव सह लेबर कमिश्नर को 5 मई को कोर्ट में सशरीर हाजिर होने का निर्देश दिया है. 

 

मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि जब प्रधान सचिव सह लेबर कमिश्नर की ओर से 30 अप्रैल 2019 को याचिकाकर्ता रुपेश रंजन को अनुकंपा पर नियुक्त करने का आदेश दिया गया था तो इस आदेश का पालन अनुकंपा समिति के अध्यक्ष सह डीसी रांची ने क्यों नहीं किया?

 

क्या प्रधान सचिव से ऊपर रांची डीसी हैं, जिन्होंने सचिव के आदेश का पालन नहीं किया है. कोर्ट ने कहा कि प्रधान सचिव सह लेबर कमिश्नर के आदेश का पालन नहीं करने पर डीसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी जानकारी दी जाए. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय ने पक्ष रखा.

 

इससे पहले मामले में रांची डीसी सह अनुकंपा नियुक्ति समिति रांची के अध्यक्ष के बदले मामले में अन्य की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया जिसे कोर्ट ने नामंजूर कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि मामले में रांची डीसी को खुद स्तर पर शपथ पत्र दाखिल करना था. 

 

इसके बाद रांची डीसी की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर कोर्ट को बताया गया कि चूकि मृतक के बड़े पुत्र ने एनओसी नहीं दिया था इसलिए अनुकंपा के आधार पर छोटे पुत्र रूपेश रंजन को नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर नहीं किया जा सकता है.

 

अनुकंपा नियुक्ति समिति ने रूपेश रंजन के अनुकंपा पर नौकरी के आवेदन को रिजेक्ट कर दिया है. जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया और मौखिक कहा की बड़ा बेटा आश्रित की श्रेणी में नहीं आता है.

 

मृतक के बाद उनके आश्रित का भरण पोषण का मामला सुलझाया जाना चाहिए था. अगर बड़ा बेटा NOC न दे तो भी छोटे पुत्र रुपेश रंजन जिसे नौकरी देने के लिए प्रधान सचिव सह लेबर कमिश्नर ने आदेश दिया है उन्हें नौकरी मिलनी चाहिए. 

 

क्या है मामला

दरअसल, लेबर डिपार्टमेंट में कार्यरत राजकुमार राम की मृत्यु के बाद उनके बड़े पुत्र अनिल कुमार ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए लेबर डिपार्टमेंट में आवेदन दिया था. इस आवेदन को विभाग ने यह करते हुए खारिज कर दिया कि उनकी उम्र सीमा नौकरी के लिए ज्यादा है. लेकिन विभाग ने यह भी कहा कि मृतक के छोटे बेटे की उम्र नौकरी के लिए सही है इसलिए उन्हें नौकरी दी जा सकती है.

 

इस आदेश के खिलाफ अनिल कुमार ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी,  उनकी रिट याचिका खारिज कर दी गई थी. इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील दाखिल की थी, जिसमें छोटे बेटे रूपेश रंजन की रिट याचिका की भी साथ में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अनिल कुमार की अपील (LPA ) को खारिज कर दिया. 

 

वहीं, छोटे पुत्र रूपेश रंजन के पक्ष में फैसला देते हुए एकल पीठ के आदेश का अनुपालन 6 महीने में करने का निर्देश दिया था. लेकिन अनुकंपा नियुक्ति समिति रांची के अध्यक्ष सह रांची डीसी की ओर से एकल पीठ के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर रुपेश रंजन ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है.

 

वहीं, मामले में अनिल कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. जिसमें प्रतिवादी रुपेश रंजन के शपथ पत्र में उनकी मां की ओर से यह स्पष्ट किया गया था कि उन्हें इस बात से कोई आपत्ति नहीं है कि उनके छोटे बेटे को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति मिले, इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है.

 

उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह भी बताया गया था कि बड़े बेटे अनिल कुमार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने की जानकारी उन्हें नहीं थी. यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

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