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बिना नोटिस गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट की सख्ती, कहा- अवमानना मामला सुनवाई योग्य है

झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में पुलिस की मनमानी हिरासत पर ब्रेक लगाते हुए कलिम अंसारी की अवमानना याचिका को सुनवाई योग्य (Maintainable) माना है. हाईकोर्ट ने बिना नोटिस गिरफ्तारी से जुड़े एक मामले में  टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पुलिस सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है.
 
  • बिना नोटिस गिरफ्तारी पर अवमानना मामला सुनवाई योग्य

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में पुलिस की मनमानी हिरासत पर सख्ती दिखाई है. साथ ही कोर्ट ने कलिम अंसारी की अवमानना याचिका को सुनवाई योग्य (Maintainable) माना है. हाईकोर्ट ने बिना नोटिस गिरफ्तारी से जुड़े एक मामले में  टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पुलिस सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है. यह टिप्पणी हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट  ने कलीम अंसारी से जुड़े अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान की.

 

निर्देशों का पालन ना करने पर विभागीय कार्रवाई व अवमानना मुकदमा चलेगा

खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार फैसले के पैरा-11.7 में स्पष्ट है कि यदि इन निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित हाईकोर्ट पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर सकता है.

 

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) में साफ निर्देश है कि 7 साल से कम सजा वाले अपराधों में नोटिस जरूरी है, ताकि आरोपी जांच में सहयोग कर सके. नोटिस दो हफ्ते में जारी न करने पर पुलिस अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई और हाईकोर्ट में अवमानना का मुकदमा चल सकता है.

 

कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता द्वारा दायर अवमानना याचिका सुनवाई योग्य (Maintainable) है. 

 

जानें क्या है मामला

याचिकाकर्ता कलीम अंसारी की ओर से अधिवक्ता  ने दलील दी कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करते समय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41-A (अब Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 की धारा 35(3)) के तहत नोटिस जारी नहीं किया. जबकि सात वर्ष से कम सजा वाले अपराधों में पहले नोटिस देकर जांच में सहयोग के लिए बुलाना अनिवार्य है.

 

वकील ने कहा कि पुलिस ने सीधे गिरफ्तारी कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है. उन्होंने अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) का हवाला देते हुए कहा कि इस फैसले में स्पष्ट निर्देश है कि नोटिस दिए बिना गिरफ्तारी करने पर संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है. 

 

मामले में हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि मामले को आगे की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया अनुसार आगे बढ़ाया जाए. 

 

 

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