Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

बीमा कंपनी का झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के दुर्घटना, गॉल ब्लाडर स्टोन के ऑपरेशन का क्लेम देने से इंकार

Ranchi : बीमा कंपनी ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के इलाज से संबंधित 100 से अधिक दावों को रद्द कर दिया है. इसमें दुर्घटना, फ्रैक्चर, गॉल ब्लडर स्टोन, पित्त की थैली में पत्थरी से संबंधित ऑपरेशन के दावे शामिल है. कंपनी ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा किये गये इन दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि इन बीमारियों का इलाज उनकी पॉलिसी में शामिल नहीं है. बीमा कंपनी द्वारा रद्द किये गये दावों में करीब एक करोड़ रुपये की राशि निहित बतायी जाती है.
Advertisement
Advertisement
  • बीमा कंपनी द्वारा रद्द किये गये दावों में करीब एक करोड़ रुपये की राशि निहित बतायी जाती है.
  • दुर्घटना के इलाज से संबंधित दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह पॉलिसी में शामिल नहीं है.

Ranchi : बीमा कंपनी ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के इलाज से संबंधित 100 से अधिक दावों को रद्द कर दिया है. इसमें दुर्घटना, फ्रैक्चर, गॉल ब्लडर स्टोन, पित्त की थैली में पत्थरी से संबंधित ऑपरेशन के दावे शामिल है. कंपनी ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा किये गये इन दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि इन बीमारियों का इलाज उनकी पॉलिसी में शामिल नहीं है. बीमा कंपनी द्वारा रद्द किये गये दावों में करीब एक करोड़ रुपये की राशि निहित बतायी जाती है.

 

राज्य सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के लिए लागू की गयी स्वास्थ्य बीमा योजना में कैशलेस की सुविधा है. इसके अलावा किसी कर्मचारी द्वारा बीमा कंपनी द्वारा सूचीबद्ध अस्पताल के बदले दूसरे अस्पताल में इलाज कराने पर हुए खर्च के भुगतान के लिए दावा करने का प्रावधान है. बीमा कंपनी ने जिन 100 से अधिक कर्मचारियों के इलाज से संबंधित दावों को खारिज किया है, उन कर्मचारियों ने कंपनी द्वारा सूचीबद्ध अस्पताल के बदले दूसरे अस्पताल में इलाज कराया था.

 

 

कंपनी ने दुर्घटना के इलाज से संबंधित दावों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह पॉलिसी में शामिल नहीं है. दुर्घटना से संबंधित इलाज के दावों को खारिज किये जाने की वजह से राज्य के कर्मचारी उलझन में हैं. क्योंकि किसी भी बीमा पॉलिसी में दुर्घटना के इलाज में हुए खर्च की भरपाई पॉलिसी जारी करने की तिथि से ही प्रभावी होता है. व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी में दुर्घटना के अलावा अन्य बीमारियों के इलाज के लिए वेटिंग पीरियड का प्रावधान है. लेकिन ग्रुप बीमा पॉलिसी में वेटिंग पीरियड नहीं होता. इसके बावजूद बीमा कंपनी द्वारा दुर्घटना से संबंधित दावों को खारिज करना आश्चर्यजनक है.

 

इसे भी पढ़ें...

 

राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने का फैसला वर्ष 2013 में किया था. लेकिन इसे वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू करना संभव हो सका. सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए कर्मचारियों को दिया जाने वाले चिकित्सा भत्ता को बंद कर उसी पैसों से बीमा पॉलिसी का प्रीमियम देने का फैसला किया. सरकार ने स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने के लिए वर्ष 2024 में टेंडर प्रकाशित किया. इसमें टाटा एआइजी, नेशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस, बजाज एलियांज, आइसीआईसीआई लोम्बार्ड ने हिस्सा लिया. मूल्यांकन के बाद टाटा एआइजी को स्वास्थ्य बीमा योजना का काम मिला था. बताया जाता है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए भी टाटा एआइजी को ही स्वास्थ्य बीमा योजना का काम मिला है.

 

बीमा कंपनी द्वारा रद्द किये गये कुछ दावों का उदाहरण

मरीज का नाम  बीमारी  रद्द करने का कारण
नंद किशोर साव  फ्रैक्चर   पॉलिसी में शामिल नहीं.
शकुंतला लाल   लंग्स में इनफेक्शन  पॉलिसी में शामिल नहीं.
आशुरी रंजन   बच्चे का जन्म(सिजेरियन)  पॉलिसी में शामिल नहीं.
मुंशी तिर्की   डायलिसिस   पॉलिसी में शामिल नहीं.
बिरेंद्र कुमार सिंह पित्त की थैली में पत्थर  पॉलिसी में शामिल नहीं.
सुमित्रा देवी  पित्त की थैली में पत्थर   पॉलिसी में शामिल नहीं.
सुनील कुमार वर्मा  हाइड्रोसिल, प्रोटेस्ट बढ़ना  पॉलिसी में शामिल नहीं.
समीर कुमार मिश्रा   कैंसर   पॉलिसी में शामिल नहीं.
स्वर्णलता सिंह   गॉल ब्लडर स्टोन  पॉलिसी में शामिल नहीं.
हरधन दास  किमोथिरेपी  पॉलिसी में शामिल नहीं.
बैजनाथ यादव   सिवियर फेलसिपारम मलेरिया  पॉलिसी में शामिल नहीं.
ललिता कुमारी   पेट में दर्ज  पॉलिसी में शामिल नहीं.
मोहम्मद सरफुद्दीन   किडनी की बीमारी   पॉलिसी में शामिल नहीं.
सरिता कुमारी   हार्ट अटैक   पॉलिसी में शामिल नही.

 

इसे भी पढ़ें....

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही