Ranchi: हाईकोर्ट ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (CMPFO) के अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने CMPFO को याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2019 से असिस्टेंट कमिशनर के पद पर पदोन्नति देने पर विचार करने और उनकी पदोन्नति की तिथि वर्ष 2024/2025 के बजाय वर्ष 2019 से प्रभावी करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने 5 याचिकाकर्ताओं की याचिका स्वीकार कर ली. हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता संख्या-6 (राकेश रंजन) को इस राहत से बाहर रखा, क्योंकि उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और सेवा से बर्खास्तगी का मामला सामने आया. मामले में नवीन निश्चल, मित्रजीत कुमार, प्रदीप कुमार, नवीन प्रकाश, राहुल कुमार और राकेश रंजन ने याचिका दायर की थी. कोर्ट ने CMPFO को निर्देश दिया कि 5 याचिकाकर्ता के मामलों पर वर्ष 2019 से सहायक आयुक्त पद पर पदोन्नति देने के संबंध में आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर आवश्यक आदेश जारी करे, ताकि उनकी पदोन्नति की तिथि वर्ष 2024/2025 के बजाय वर्ष 2019 से प्रभावी की जा सके.
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्ष 2015 में प्रोविडेंट फंड इंस्पेक्टर के रूप में नियुक्त हुए थे और वर्ष 2017 के भर्ती नियमों के अनुसार वर्ष 2019 में सहायक आयुक्त पद पर पदोन्नति के पात्र हो गए थे. इसके बावजूद CMPFO ने उन्हें पदोन्नति नहीं दी, जबकि अन्य कर्मचारियों को उसी भर्ती नियम के तहत पदोन्नति और अन्य लाभ प्रदान किए गए. कोर्ट ने पाया कि वर्ष 2017 से 2024 तक पूरे CMPFO में भर्ती नियम, 2017 लागू रहे और अन्य पात्र कर्मचारियों को उसी नियम के तहत पदोन्नति और वित्तीय लाभ मिले, लेकिन याचिकाकर्ताओं को इन लाभों से वंचित रखा गया.
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि CMPFO ने अपने जवाबी हलफनामे में स्वयं स्वीकार किया था कि याचिकाकर्ता चार वर्ष की नियमित सेवा पूरी करने के बाद सहायक आयुक्त पद पर पदोन्नति के पात्र थे. कोर्ट ने कहा कि तेलंगाना हाईकोर्ट में लंबित विवाद समाप्त होने के बाद पदोन्नति देने में कोई कानूनी बाधा नहीं रह गई थी. इसलिए केवल वर्ष 2024 के नए भर्ती नियमों के तहत पदोन्नति देना उचित नहीं माना जा सकता.
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