- आरएमसी पर एफआईआर करने से रोकने के आग्रह को कोर्ट ने नहीं माना
- एसीबी ने अनुसंधान से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट दी
- एसीबी को अनुसंधान जारी रखने और स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा
Ranchi : रिम्स में मरीजों के बेहतर इलाज व बुनियादी सुविधाओं को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई बुधवार को हाईकोर्ट में हुई. मामले में रिम्स परिसर में अवैध रूप से नक्शा स्वीकृत और अतिक्रमण को लेकर रांची नगर निगम (आरएमसी) के दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर करने से रोकने का आग्रह किया गया. इसे लेकर आरएमसी ने हस्तक्षेप याचिका (आईए) दाखिल की.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने आरएमसी की हस्तक्षेप याचिका को खारिज करते हुए आरएमसी के आग्रह को नहीं माना. हालांकि कोर्ट ने आरएमसी को छूट दी कि वह अपनी बात मामले के अनुसंधानकर्ता के समक्ष रख सकता है.
वहीं खंडपीठ ने रिम्स को निर्देश दिया कि वह कोर्ट के 10 अक्टूबर 2025 के आदेश के आलोक में रिम्स में चल रही नियुक्ति और मेडिकल उपकरणों की खरीदारी की प्रक्रिया को 30 मई तक पूरी कर लें. इस संबंध में कोर्ट के पूर्व के आदेश के अनुपालन पर रिम्स निदेशक को अगली सुनवाई में जवाब दाखिल करने का निर्देश कोर्ट ने दिया.
सुनवाई के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की ओर से रिम्स परिसर में अतिक्रमण के दोषियों के खिलाफ एसीबी में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित सीलबंद रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. कोर्ट ने एसीबी को अनुसंधान जारी रखने का निर्देश देते हुए 23 अप्रैल तक अनुसंधान की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश एसीबी को दिया. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार दुबे ने पैरवी की.
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