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सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया इलाहाबाद हाईकोर्ट के पजामा खोलने को दुष्कर्म नहीं मानने का विवादित फैसला

New Delhi:  सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें नाबालिग लड़की का पायजामा खोलने को दुष्कर्म नहीं माना गया था. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिये गये इस विवादित फैसले पर न्यायाधीश बीआर गवई और एजी मसीह ने स्वत: सज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी.
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New Delhi:  सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें नाबालिग लड़की का पायजामा खोलने को दुष्कर्म नहीं माना गया था. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिये गये इस विवादित फैसले पर न्यायाधीश बीआर गवई और एजी मसीह ने स्वत: सज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी. 


साथ ही इसे चौंकाने वाला और असंवेदनशील करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले पर विचार करने के लिए मामला शुरू किया था. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश एनवी अंजारिया की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले को रद्द कर दिया.


सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हाईकोर्ट ने अपराध के स्थापित कानून के सिद्धांतों की गलत व्याख्या की थी. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामले से संबंधित विशेष न्यायालय पोक्सो एक्ट की धारा 18 के साथ आईपीसी की धारा 376 के तहत जारी समन को बहाल कर दिया. यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में दर्ज करायी गयी एक प्राथमिकी से संबंधित है.

 

नाबालिग लड़की की मां द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में यह आरोप लगाया गया था कि पवन और आकाश नाम के युवकों ने उनकी 11 वर्षीय लड़की के स्तनों को पकड़ लिया. आकाश ने उसके पायजामा के स्ट्रिंग को तोड़ दिया और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की. इस शिकायत के आधार पर सक्षम न्यायालय ने पोक्सो एक्ट की धारा 18 और आइपीसी की धारा 376 के तहत समन जारी किया था. इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभियुक्तों के कारनामे को दुष्कर्म करने का प्रयास नहीं मानते हुए अपना फैसला सुनाया था.

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