Ranchi News: झारखंड हाइकोर्ट ने चतरा के कनहाचट्टी में पेट्रोल पंप डीलरशिप हासिल करने के लिए दायर अपील को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आवेदक के पास डीलरशिप के लिए निर्धारित न्यूनतम जमीन का आवश्यक स्वामित्व नहीं था. साथ ही संबंधित पेट्रोल पंप की डीलरशिप पहले ही दूसरे आवेदक को दी जा चुकी है और वहां रिटेल आउटलेट संचालित हो रहा है.
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने संजय कुमार दुबे की अपील पर यह फैसला सुनाया. अदालत ने एकल पीठ के 22 अगस्त 2023 के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी. खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है.
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दरअसल यह मामला कनहाचट्टी ब्लॉक से उंटामोड़ की ओर दो किलोमीटर के दायरे में पेट्रोल पंप डीलरशिप आवंटन से जुड़ा था. इंडियन ऑयल ने 25 नवंबर 2018 को इसके लिए विज्ञापन जारी किया था. संजय कुमार दुबे ने 23 दिसंबर 2018 को प्लॉट संख्या 166 और 167 की जमीन के दस्तावेजों के साथ आवेदन किया था. 21 जून 2019 को हुए ड्रॉ में उनका चयन हुआ और उनसे प्रारंभिक सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में 40 हजार रुपये जमा करने को कहा गया.
इसके बाद 23 अक्टूबर 2019 को इंडियन ऑयल की लैंड इवैल्यूएशन कमेटी ने स्थल का निरीक्षण किया. हालांकि 29 फरवरी 2020 को निगम ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया. निगम के अनुसार, उनके पास निर्धारित आकार और क्षेत्रफल की जमीन का आवश्यक स्वामित्व नहीं था.
कोर्ट ने कहा कि आवेदक पूरे 20 डिसमिल पर अपना स्वामित्व साबित करने वाला कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका. अदालत ने यह भी कहा कि आवेदक के चाचा की जमीन को ब्रोशर में निर्धारित परिवार के सदस्यों की जमीन नहीं माना जा सकता था. डीलरशिप के लिए आवेदक और उसके पात्र पारिवारिक सदस्यों के पास आवश्यक जमीन का पर्याप्त हिस्सा होना जरूरी था.
बाद में दूसरे आवेदक को मिली डीलरशिप
कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि इंडियन ऑयल ने बाद में जितेंद्र कुमार दुबे के पक्ष में उक्त डीलरशिप का लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर दिया था और रिटेल आउटलेट के संचालित होने की बात भी सामने आई थी. इसके बावजूद अपीलकर्ता ने समय पर संबंधित आवंटी को पक्षकार नहीं बनाया.
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