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हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका की खारिज, CAT का आदेश सही ठहराया

डाक विभाग से जुड़े एक लंबे सेवा विवाद में फैसला सुनाते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी. केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT)  के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए डाक विभाग ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने कहा कि CAT का आदेश सही है और इसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है.
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  •  नियमितीकरण का उद्देश्य “बैकडोर एंट्री” रोकना है लेकिन लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के साथ न्याय भी जरूरी है
  • लगभग 25 वर्षों तक लगातार सेवा देने वाले कर्मी का नियमितीकरण कानून के अनुरूप और न्यायसंगत है

Ranchi: डाक विभाग से जुड़े एक लंबे सेवा विवाद में फैसला सुनाते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी. केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT)  के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए डाक विभाग ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने कहा कि CAT का आदेश सही है और इसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है. 


कोर्ट ने राम सेवक महतो के पक्ष में CAT के आदेश को बरकरार रखा. हालांकि, सुनवाई के दौरान डाक विभाग ने स्पष्ट किया था कि वह केवल नियमितीकरण के आदेश को चुनौती दे रहा है, ‘टेम्पररी स्टेटस’ को नहीं.

 

क्या था मामला

राम सेवक महतो, जो रांची जीपीओ में वर्षों तक कार्यरत रहे, ने अपनी सेवा के नियमितीकरण (Regularization) और ‘टेम्पररी स्टेटस’ की मांग को लेकर मामला दायर किया था. केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने 15 मार्च 2024 के आदेश में उनके पक्ष में निर्णय देते हुए ‘टेम्पररी स्टेटस’ देने 3 साल बाद ग्रुप ‘D’ (अब MTS) का दर्जा देने और नियमितीकरण पर विचार करने का निर्देश दिया था.


हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले में कहा कि राम सेवक महतो ने लगभग 25 वर्षों तक लगातार सेवा दी. वे 10 सितंबर 1993 से सेवा में थे, जो नीति के अनुसार महत्वपूर्ण है. उन्हें खाली स्वीकृत पद पर काम कराया गया. 


ऐसे में उनका नियमितीकरण कानून के अनुरूप और न्यायसंगत है. खंडपीठ ने अपने निर्णय में Secretary State of Karnataka v Umadevi सहित कई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि नियमितीकरण का उद्देश्य “बैकडोर एंट्री” रोकना है लेकिन लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के साथ न्याय भी जरूरी है.

 

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