Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एनआईए से जुड़े एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी कुंदन कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं गौतम कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं, इसलिए उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता. हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज करने के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है. इसलिए आरोपी की अपील खारिज कर दी.
क्या कहा हाईकोर्ट ने
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ जांच में पर्याप्त सामग्री मिली है. उसके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं. सह-अभियुक्तों के साथ समानता (parity) का सिद्धांत भी इस मामले में लागू नहीं होता. कोर्ट ने यह भी कहा कि यूएपीए के तहत जमानत पर विचार करते समय धारा 43D(5) के प्रावधान लागू होते हैं और जब तक आरोप प्रथम दृष्टया गलत न लगें, तब तक जमानत नहीं दी जा सकती.
क्या है मामला
अभियोजन के अनुसार 18 दिसंबर 2020 को लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र में टेटरियाखंड कोलियरी के पास कुछ अज्ञात लोगों ने वाहनों में आग लगा दी और अंधाधुंध फायरिंग की. इस घटना में चार ट्रक और एक मोटरसाइकिल जला दी गई तथा चार नागरिक घायल हो गए. घटनास्थल से जले हुए वाहनों के अवशेष, केन बम के टुकड़े, खाली गैलन, कारतूस और धमकी भरे पर्चे बरामद किए गए थे.
जांच में सामने आया कि गैंगस्टर सुजीत सिन्हा और अमन साहू सहित अन्य आरोपियों ने मिलकर कोयला कंपनियों और ट्रांसपोर्टरों से रंगदारी वसूलने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने की साजिश रची थी. बता दें कि मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय के निर्देश पर जांच National Investigation Agency (एनआईए) को सौंप दी गई थी.
दरअसल, एनआईए की जांच में कुंदन कुमार को सह-अभियुक्त के रूप में गिरफ्तार किया गया था. जांच एजेंसी ने उसके खिलाफ दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी. उस पर हथियार और गोला-बारूद से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
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