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बीएयू की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट से खारिज

Ranchi News: यह याचिका इशाक कच्छप, बिलेंद्र राम और मो. संजर आलम ने दायर की थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अफसर रजा  ने पक्ष रखा. वहीं प्रतिवादी बीएयू की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा. उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के शंकरसन दास बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया गया. इस फैसले के अनुसार, किसी पद के लिए आवेदन करने या चयन प्रक्रिया में शामिल होने मात्र से अभ्यर्थी को नियुक्ति का अटल अधिकार प्राप्त नहीं होता.
 
फाइल फोटो
  •  हाईकोर्ट ने दी नई चुनौती देने की छूट
  • 2019 और 2023 के विज्ञापन के तहत आवेदन करने वाले तीन अभ्यर्थियों को नहीं मिली राहत
  • कोर्ट ने कहा- आवेदन करने मात्र से नियुक्ति का अधिकार नहीं

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), कांके में विभिन्न पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और परिणाम घोषित करने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है. हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि केवल विज्ञापन के आधार पर आवेदन करने से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता. अदालत ने हालांकि याचिकाकर्ताओं को 27 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती देने की छूट दी है, जिसके तहत विश्वविद्यालय ने 2023 में जारी नियुक्ति विज्ञापन रद्द करने का निर्णय लिया था.

 

यह याचिका इशाक कच्छप, बिलेंद्र राम और मो. संजर आलम ने दायर की थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अफसर रजा  ने पक्ष रखा. वहीं प्रतिवादी बीएयू की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा. उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के शंकरसन दास बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया गया. इस फैसले के अनुसार, किसी पद के लिए आवेदन करने या चयन प्रक्रिया में शामिल होने मात्र से अभ्यर्थी को नियुक्ति का अटल अधिकार प्राप्त नहीं होता.

 

2019 में निकला था नियुक्ति विज्ञापन

याचिका के अनुसार, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने दो मार्च 2019 को प्लंबर, हेल्पर सहित विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था. याचिकाकर्ताओं ने निर्धारित योग्यता के आधार पर आवेदन किया था. उन्हें प्रवेश पत्र भी जारी किए गए थे और उन्होंने चयन प्रक्रिया में भाग लिया था. इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने परिणाम प्रकाशित नहीं किया.

 

परिणाम घोषित नहीं होने पर झारखंड कर्मचारी मजदूर मोर्चा ने आठ जुलाई 2021 को विश्वविद्यालय को पत्र देकर परिणाम जारी करने की मांग की थी. इसके बाद विश्वविद्यालय ने 30 जनवरी 2023 को फिर से विज्ञापन जारी कर संबंधित पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए. याचिकाकर्ताओं ने इस विज्ञापन के तहत भी आवेदन किया, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी.

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राज्य सरकार के निर्देश पर रोकी गई थी प्रक्रिया

विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट में दायर जवाब में बताया कि राज्यपाल सचिवालय के नौ जुलाई 2019 और 27 दिसंबर 2019 के निर्देशों के बाद वर्ष 2019 की नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गई थी. नए कुलपति की नियुक्ति के बाद पदों के लिए नए सिरे से विज्ञापन जारी किया गया. हालांकि राज्य के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव ने 11 मई 2023 को ज्ञापन जारी कर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रोकने का निर्देश दिया.

 

विश्वविद्यालय के अनुसार, झारखंड सरकार के निर्देश और दो जून 2014 की अधिसूचना के प्रावधानों के मद्देनजर इन पदों पर नियुक्ति झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से लिखित परीक्षा आयोजित कर की जानी थी. इसी आधार पर विश्वविद्यालय ने 15 जून 2023 से नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का निर्णय लिया और इस संबंध में 27 जनवरी 2026 को आदेश जारी किया.

 

कोर्ट ने कहा- रद्द आदेश को नहीं दी गई थी चुनौती

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि इसी तरह के एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया रोकने संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए विश्वविद्यालय को प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था.

 

हालांकि विश्वविद्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि उस मामले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से वित्तपोषित पद शामिल थे, जबकि वर्तमान मामले के पद राज्य सरकार से वित्तपोषित हैं. इसलिए विश्वविद्यालय राज्य सरकार के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है.

 

अदालत ने पाया कि विश्वविद्यालय ने 27 जनवरी 2026 के आदेश के जरिए वर्ष 2023 के विज्ञापन को रद्द करने का निर्णय लिया था, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को निरस्त करने की मांग करते हुए कोई अलग आवेदन दाखिल नहीं किया. ऐसे में अदालत ने कहा कि इस याचिका में विज्ञापन रद्द करने के आदेश की वैधता की जांच नहीं की जा सकती.

 

चयन सूची जारी नहीं होने से नहीं बना नियुक्ति का अधिकार

हाईकोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में विश्वविद्यालय ने याचिकाकर्ताओं के परिणाम या चयन सूची जारी नहीं की थी. इसलिए उनके पक्ष में नियुक्ति का कोई अधिकार उत्पन्न नहीं हुआ था. अदालत ने इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी. हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ताओं को 27 जनवरी 2026 के आदेश को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती देने की स्वतंत्रता दी है.

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