Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि रेलवे लेवल क्रॉसिंग पर बंद गेट, चेन या बैरियर को तोड़ना रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 160(2) के तहत गैर-जमानती अपराध है.
दरअसल रेल सुरक्षा बल (RPF) और केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट से पिछले आदेश में संशोधन की मांग की थी. 7 मई 2026 को आरोपी आनंद कुमार यादव की पूर्व-अग्रिम जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि धारा 160(2) जमानती अपराध है. RPF की ओर से यह तर्क दिया गया कि यह वर्गीकरण गलत था, क्योंकि इस धारा के तहत सजा की अधिकतम सीमा पांच साल की कैद है.
अदालत ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने RPF के तर्क को सही माना और सुप्रीम कोर्ट के Union of India v. State of Assam, (2004) 7 SCC 474 फैसले के साथ-साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में अपराधों के वर्गीकरण का हवाला दिया. कोर्ट ने 7 मई 2026 के आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि - “रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 160(2) के तहत किया गया अपराध गैर-जमानती अपराध है.”
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने रेलवे फाटक से स्कूटी टकराने के मामले में आरोपी आनंद कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अदालत ने पूर्व में कहा था कि रेलवे अधिनियम की धारा 160(2) के तहत दर्ज अपराध जमानतीय है. ऐसे में इस मामले में अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को नियमित जमानत लेने की छूट दी थी.
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तब अदालत को बताया गया था
अग्रिम याचिका की जमानत पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया था कि उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है. घटना के समय वह रेलवे फाटक पार करने का प्रयास कर रहा था. इसी दौरान अचानक गेटमैन ने फाटक का बैरियर गिरा दिया. इससे वह अपनी स्कूटी पर ब्रेक नहीं लगा सका और स्कूटी रेलवे फाटक के लोहे से हल्के से टकरा गई. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दावा किया कि इस घटना में रेलवे फाटक को कोई नुकसान नहीं हुआ है. इन दलीलों के आधार पर उन्होंने अग्रिम जमानत देने का आग्रह किया था.
वहीं अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया था कि रेलवे अधिनियम की धारा 160(2) के तहत दर्ज अपराध जमानतीय है. इसलिए अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं है.
बाद में हुई सुनवाई में क्या कुछ सामने आया
फिर सुनवाई के दौरान अदालत को याचिकाकर्ता के वकील की दलील में दम लगा, क्योंकि 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम असम राज्य' (2004) 7 SCC 474 के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय का फैसला इस मुद्दे को पहले ही स्पष्ट कर चुका है. इसके अलावा 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' में अन्य कानूनों के तहत अपराधों का जो वर्गीकरण दिया गया है, वह भी इस बात की पुष्टि करता है. इसलिए पूर्व में पारित आदेश में संशोधन किया गया. इसके साथ ही केस का निपटारा कर दिया गया.
कानूनी प्रावधान
• धारा 160(1): बंद लेवल क्रॉसिंग का गेट या बैरियर खोलने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है.
• धारा 160(2): बंद लेवल क्रॉसिंग का गेट, चेन या बैरियर तोड़ने पर पांच साल तक की सजा हो सकती है.
• अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद धारा 160(2) का अपराध गैर-जमानती माना जाएगा.
असर क्या होगा
इस फैसले से रेलवे सुरक्षा को बड़ा बल मिला सकता है. अब लेवल क्रॉसिंग की बैरियर तोड़ने वाले आरोपी को जमानत अपने अधिकार के रूप में नहीं मिलेगी, बल्कि जमानत याचिका पर सामान्य गैर-जमानती अपराध की प्रक्रिया और शर्तों के अनुसार विचार हो सकेगा. यह आदेश किसी को दोषी या निर्दोष घोषित नहीं करता; यह केवल अपराध की प्रकृति-जमानती या गैर-जमानती से जुड़ी कानूनी गलती को ठीक करता है.
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