Patna: पटना हाईकोर्ट ने 10 महीने से जब्त ट्रक के मामले में अहम फैसला सनीया है. शराबबंदी कानून के तहत गोपालगंज पुलिस चेकिंग के दौरान ट्रक को जब्त कर कुचाएकोट थाना में ले आई थी. 14 अगस्त 2025 को उस थाना के दारोग सत्येन्द्र कुमार राय ने ट्रक पर प्राथमिकी दर्ज किया था. केस तो दर्ज कर कर लिया गया, लेकिन ट्रक से शराब जब्त नहीं हुई थी.
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ट्रक को सिर्फ इस संदेह पर जब्त किया था कि उस ट्रक के केबिन में शराब की महक जैसा प्रतीत हुआ. इसलिए पुलिस ने यह मान लिया कि कुछ समय पहले शराब की खेप की स्मगलिंग जरूर हुई होगी, जिसे थाना क्षेत्र में पहुंचने से पहले कहीं उतार लिया गया होगा.
पटना हाईकोर्ट ने पुलिस के इस अतिश्योक्ति भरे कारनामे पर कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि ट्रक मालिक राजेश कुमार यादव को बतौर मुआवजा दो लाख रुपये और मुकदमे में हुए खर्च पर 15 हजार रुपये का भुगतान करें.
हाईकोर्ट की डबल बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई. जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस कुमार मनीष की खंडपीठ ने राजेश कुमार यादव की रिट याचिका पर सुनवाई की.
कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि कुचायकोट थाना में जब्त याचिकाकर्ता के ट्रक की भौतिक जांच करवे और यदि उस ट्रक में किसी तरह की टूट फूट या यांत्रिक गड़बड़ी निकले तो उसको ठीक कराये. साथ ही हर्जाना की राशि भी याचिकाकर्ता को दें. उस राशि की वसूली इस कांड के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों से की जाय.
इस मामले में सुनवाई करते वक्त जब कोर्ट ने जब दारोगा सत्येंद्र राय ने शराबंबदी कानून के प्रावधानों के बारे में पूछा, तो उसने कोर्ट को बताया कि उसने इस कानन से संबंधित कानून को नहीं पढ़ा है.
सुनवाई के दौरान गोपालगंज के एसपी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में हाजिर हुए थे. खंडपीठ ने आश्चर्य जताते हुए एसपी से कहा कि, जो दारोगा अपने जवाबी हलफनामें में दावा करता है कि उसने 40 शराबबंधी मामलों का अनुसंधान किया है, उसने इस कानून के प्रावधनों को पढ़ा ही नहीं है.
गोपालगंज एसपी ने कोर्ट को आश्वस्त किया को वो इस मामले में शामिल गैर जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे.
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