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चतरा में पाइपलाइन से जलापूर्ति योजना केस में हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका किया समाप्त

Ranchi: चतरा में पाइपलाइन से जलापूर्ति योजना से जुड़े मामले में दायर अवमानना याचिका की हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में चतरा डीसी कोर्ट में उपस्थित थी. अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने कोर्ट को बताया कि जिस कंपनी को यह काम दिया गया था, उसने काम पूरा नहीं किया. रिट कोर्ट ने भी कंपनी को बकाया भुगतान करने का निर्देश नहीं दिया था. रिट कोर्ट ने जुडको को कहा था कि इस मामले में वह तर्कसंगत आदेश पारित करें.
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  • अवमानना का मामला नहीं बनता है
  • चतरा डीसी और प्रोजेक्ट डायरेक्टर जुडको हुए हाजिर

Ranchi: चतरा में पाइपलाइन से जलापूर्ति योजना से जुड़े मामले में दायर अवमानना याचिका की हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में चतरा डीसी कोर्ट में उपस्थित थी. अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने कोर्ट को बताया कि जिस कंपनी को यह काम दिया गया था, उसने काम पूरा नहीं किया. रिट कोर्ट ने भी कंपनी को बकाया भुगतान करने का निर्देश नहीं दिया था. रिट कोर्ट ने जुडको को कहा था कि इस मामले में वह तर्कसंगत आदेश पारित करें. 

 

जुडको की ओर से तर्कसंगत आदेश पारित कर कहा गया था कि कंपनी का बकाया के मद में करीब 5 करोड़ रूपया बनता है. डीएमएफटी फंड से भुगतान किया जाएगा. अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने कोर्ट को बताया कि कंपनी को 20 करोड़ रूपया का भुगतान किया जा चुका है. मामले में डीसी चतरा ने कंपनी द्वारा कराए गए काम की जांच कराई थी, लेकिन काम अधूरा पाया गया. इस वजह से कंपनी को बकाया भुगतान नहीं किया गया है. 

 

सरकार का पक्ष जानने के बाद कोर्ट ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर, जुडको को कोर्ट में हाजिर होने को कहा. जिसके बाद प्रोजेक्ट डायरेक्टर जुडको कोर्ट में हाजिर हुए. कोर्ट ने उनसे पूछा कि 20 करोड़ से अधिक की राशि खर्च हो चुकी है, लेकिन चतरा के लोगों को भी पाइपलाइन से पानी नहीं मिला है. 
पाइपलाइन बना लेने का दावा कंपनी द्वारा किया जा रहा है, ऐसे में स्पष्ट करें की चतरा के लोगों को किस तरह पानी उपलब्ध कराया जाएगा. उनकी ओर से बताया गया कि नया डीपीआर बनाया जा रहा है, तिलैया डैम से पानी लाकर लोगों को पाइपलाइन से पानी उपलब्ध कराया जाएगा. 

 

कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इसे अवमानना का मामला नहीं मानते हुए अवमानना याचिका को ड्रॉप कर दिया. साथ ही चतरा डीसी को उपस्थिति से छूट प्रदान की. बता दें कि यूएलज रत्ना सोराथिया इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड की ओर से अवमानना याचिका दाखिल कर बकाया भुगतान दिलाने का आग्रह कोर्ट से किया गया था. उनकी ओर से कहा गया था कि रिट कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ है. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाले खंडपीठ में हुई. प्रार्थी का कहना था कि सरकार के जमीन उपलब्ध नहीं कराने की वजह से इंटेक वेल का निर्माण नहीं हो पाया है, पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है.

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