Ranchi : इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स लिमिटेड (वर्तमान में वेदांता लिमिटेड समूह से संबद्ध) का स्टील प्लांट वन भूमि पर संचालित होने और आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियों के बिना कार्य किए जाने को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई.
कोर्ट ने PIL को निष्पादित कर दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी कि यदि संशोधित एनवायरमेंटल क्लीयरेंस अब भी लंबित है या अवैध संचालन हो रहा है तो वह "उचित मंच" के समक्ष जा सकता है.
यदि लोकायुक्त रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं हुई है तो संबंधित प्राधिकरणों से संपर्क कर सकता है. मामले में कोर्ट ने कहा कि किसी भी पक्ष ने यह नहीं बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 09.12.2021 के जजमेंट के बाद क्या प्रगति हुई.
यह भी स्पष्ट नहीं है कि संशोधित एनवायरमेंटल क्लीयरेंस पर केंद्र सरकार ने क्या निर्णय लिया. उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कोई प्रभावी आदेश पारित करना संभव नहीं है. वर्ष 2019 की यह लंबित PIL अब किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर रही है.
इससे पहले याचिकाकर्ता ने बताया कि लोकायुक्त झारखंड ने अपनी रिपोर्ट 22.12.2017 में पाया था कि संबंधित भूमि वन भूमि है. उक्त रिपोर्ट के आधार पर सरकारी विभागों ने प्लांट के संचालन पर रोक लगाई थी. आज तक संशोधित एनवायरमेंटल क्लीयरेंस (EC) नहीं मिली है, फिर भी कंपनी संचालन कर रही है.
वहीं, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि प्रारम्भ में कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) वापस ले लिया था. कंपनी ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी. बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च पहुंचा था, जहां कंपनी को राहत मिली. खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट का पूर्व आदेश का भी जिक्र किया.
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