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धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मामले में हाईकोर्ट ने CBI जांच पर रोक 24 फरवरी तक बढ़ाई

Ranchi: धनबाद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी के द्वारा निबंधन संख्या से ज्यादा विद्यार्थियों के नामांकन मामले से संबंधित राज्य सरकार की अपील (एलपीए) की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में सीबीआई जांच के आदेश पर रोक को 24 फरवरी तक के लिए बढ़ा दी है. अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी. 


मामले में अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने कोर्ट को बताया कि धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर दिया गया है. दरअसल पिछली सुनवाई में सीबीआई की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि हाईकोर्ट के आदेश के अंतर्गत मामले में पीई दर्ज कर लिया गया है. 
वहीं महाधिवक्ता राजीव रंजन ने खंडपीठ को बताया था कि धनबाद इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को सिर्फ 60 विद्यार्थियों का निबंधन 9 सितंबर 2025 को दिया गया था.

इसके बावजूद भी धनबाद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी ने 138 विद्यार्थियों का नामांकन ले लिया. चूंकि ज्यादा संख्या में विद्यार्थियों का नामांकन लिया गया था इसलिए धनबाद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी ने अपनी खामी के बावजूद हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की. जिसकी सुनवाई 12 एवं 13 जनवरी को हुई थी.  हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया था. जिसके खिलाफ राज्य सरकार एवं झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने अपील दायर किया है.

 

क्या है मामला 

 

 हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने बीते 13 जनवरी को धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी के इंजीनियरिंग के छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोके जाने की CBI जांच के आदेश दिया था. अदालत ने प्रथम दृष्टया इसे छात्रों को फंसाने और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ का मामला बताते हुए सीबीआई को झारखंड यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी(जेयूटी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICT) की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया था. 


कोर्ट ने सीबीआई को इस बात की जांच करने को कहा है कि एआइसीटीई और जेयूटी ने छात्रों को किस प्रकार फंसाया है एवं पूरे मामले में किस अधिकारी या संस्था ने क्या भूमिका निभाई है.

 

धनबाद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी ने हाईकोर्ट की एकल पीठ में दायर की थी याचिका

 

मामले में धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने हाईकोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने संस्थान को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 30 अप्रैल 2025 को विधिवत स्वीकृति प्रदान की थी. एआइसीटीई की इस स्वीकृति के आधार पर संस्थान ने छात्रों का नामांकन किया.

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