Ranchi: हाईकोर्ट में स्टोन क्रशर और इको सेंसेटिव जोन से जुड़े मामले पर दाखिल आनंद कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने संरक्षित या आरक्षित वन की सीमा से स्टोन क्रशर की दूरी कम करने के सरकारी फैसले पर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई शपथपत्र या सामग्री उपलब्ध नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि संरक्षित या आरक्षित वन की सीमा से 500 मीटर की दूरी पर स्टोन क्रशर लगाने की पाबंदी को 2015 और 2017 की अधिसूचनाओं के जरिए 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर क्यों किया गया.
इस पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन व अधिवक्त शहबाज अख्तर ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि इस संबंध में आवश्यक शपथपत्र और दस्तावेज 16 मार्च 2026 तक दाखिल किए जाएंगे. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की.
खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद अदालत की सहायता कर रहे हैं. इसे देखते हुए अंतरिम व्यवस्था के तौर पर अदालत ने State Level Environment Impact Assessment Authority को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई से पहले अदालत में 10,000 रुपये जमा करे.
इससे पहले सरकार की ओर से कहा गया था कि 1 किमी का ईको-सेंसिटिव/बफर जोन केवल वन्यजीव अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान की सीमा से लागू होता है,संरक्षित या आरक्षित वन की सीमा से नहीं. अगली सुनवाई 19 मार्च की दोपहर 2:15 बजे तय की गई है.
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