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पूर्व विधायक भानु की रिहाई के खिलाफ सरकार पहुंची हाईकोर्ट

  • पीठ ने पलामू की निचली अदालत से एलसीआर (लोअर कोर्ट रिकॉर्ड) मांगी है 
  • भवनाथपुर सेल में पदस्थापित चिकित्सक के साथ हुआ था विवाद
  • भवनाथपुर में वर्ष 2006 में एससी-एसटी एक्ट तहत दर्ज हुआ था केस

Ranchi: गढ़वा के भवनाथपुर में वर्ष 2006 को एससी-एसटी एक्ट केस से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री और भवनाथपुर के तत्कालीन विधायक भानु प्रताप शाही को रिहा किए जाने के खिलाफ दाखिल राज्य सरकार की एक्विट्टल अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने पलामू की निचली अदालत से एलसीआर (लोअर कोर्ट रिकॉर्ड) मांगी है. 


गढ़वा डीसी के माध्यम से राज्य सरकार ने भानु प्रताप शाही को रिहा किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. मामले में तत्कालीन विधायक भवनाथपुर भानु प्रताप शाही व अन्य पर एक डॉक्टर के साथ अभद्रता का आरोप था. इस मामले में भानु प्रताप शाही को पलामू व्यवहार न्यायालय के एमपी- एमएलए कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था. वहीं इस मामले में अन्य चार लोगों को छह माह की सजा सुनाई थी. इन सभी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट तहत केस दर्ज हुआ था.  

 

क्या है मामला

 

दरअसल साल 2006 में गढ़वा जिला के भवनाथपुर सेल में पदस्थापित चिकित्सक विजय कुमार ने तत्कालीन विधायक भानु प्रताप शाही समेत कई लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज कराया था. सेल के क्वार्टर को लेकर भानु प्रताप शाही और डॉक्टर विजय कुमार के बीच विवाद हुआ था. इस विवाद के बाद डॉक्टर विजय कुमार ने भानु प्रताप शाही पर जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल करने और क्वार्टर से सामानों को फेंकने का आरोप लगाते हुए केस किया था. मामले को लेकर भवनाथपुर थाना में कांड संख्या 53 /2006 दर्ज किया गया था.

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