- सरकार ने HC में कहा, पब्लिक कॉन्फिडेंस कायम रहना जरूरी था, इसलिए पूरी परीक्षा रद्द की गई
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट में JSSC-CGL (विज्ञापन संख्या 10/2023) सहित अन्य नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया.
अब कल 11 बजे जेपीएससी द्वारा आयोजित सीडीपीओ, 11वींं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा, फूड सेफ्टी ऑफिसर सहित अन्य परीक्षाओं को रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी.
राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखते हुए कहा कि JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के पीछे का महत्वपूर्ण कारण इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार है.
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मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि परीक्षा में सिस्टम की विफलता हुई है, क्योंकि जिस एजेंसी को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसने क्वेश्चन पेपर को लीक होने दिया. एजेंसी के माध्यम से अभ्यर्थियों को क्वेश्चन के उत्तर नेपाल और अन्य जगहों पर रटवाया गया. परीक्षा की पारदर्शिता कायम नहीं रह सकी.
राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता ने कहा कि परीक्षा की नियुक्त प्रक्रिया को लेकर पब्लिक कॉन्फिडेंस कायम रहना जरूरी है, ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द करना जरूरी था. कहा कि मामले में अनुसंधान जारी है और अब तक के अनुसंधान में परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर पुख्ता सबूत मिले हैं.
मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि प्राप्त दस्तावेजो से परीक्षा में गड़बड़ी, अनियमितता और भ्रष्टाचार के साफ प्रमाण मिले हैं, जो यह साबित कर रहे हैं कि परीक्षा फेयर नहीं था. इसमें दोषी अभ्यर्थियों और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग करना कठिन है. कैबिनेट ने क्वेश्चन पेपर लीक होने और परीक्षा में हुई अनियमितता को देखते हुए परीक्षा रद्द की.
हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमार हर्ष ने कहा कि JSSC-CGL परीक्षा में सिस्टमैटिक फेलियर हुई है. ब्लैक लिस्टेड एजेंसी को परीक्षा आयोजित करने का जिम्मा सौंपा गया. एजेंसी ने क्वेश्चन पेपर को लीक कराया. लीक क्वेश्चन का बड़े पैमाने पर अभ्यर्थियों के बीच प्रसार हुआ. यह बताता है कि परीक्षा में बड़े पैमाने अनियमितता हुई.
अनुसंधान में भी परीक्षा में गड़बड़ियां सामने आई. किंगपिन अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद कई नए तथ्य आए हैं. परीक्षा में गड़बड़ी के कारण वैसे अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सका है, जो इसके योग्य थे.
हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट इस नियुक्ति को रद्द किये जाने को चुनौती देने वाली आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य सहित अलग-अलग कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

