Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना से जुड़े एक मामले में मृतक के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे को बढ़ाकर 10.98 लाख रुपये कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि मुआवजा निर्धारित करते समय उपलब्ध साक्ष्यों और मृतक की वास्तविक परिस्थितियों को समग्र रूप से देखना जरूरी है.
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अदालत ने मृतक की मासिक आय 3,000 रुपये मानने के ट्रिब्यूनल के फैसले को उचित नहीं माना और इसे 6,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक ने TATA AIG General Insurance Company Ltd. की याचिका पर फैसला सुनाया.
मामले में TATA AIG General Insurance Company Ltd. ने बोकारो के दावेदारी अधिकरण के 15 दिसंबर 2016 के फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी. अधिकरण ने मृतक के आश्रितों को 7.07 लाख रुपये, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था. भुगतान में चूक होने पर 11 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज का भी प्रावधान किया गया था.
मृतक पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम और ट्यूशन करता था
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए कहा कि मृतक युवा था, पढ़ाई कर रहा था और साथ ही पार्ट टाइम काम और ट्यूशन भी करता था. अदालत ने माना कि अनौपचारिक रूप से ट्यूशन देने वाले व्यक्ति से औपचारिक रसीद या लेखा-जोखा उपलब्ध होना जरूरी नहीं है.
11 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज भी बरकरार
बीमा कंपनी ने 11 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज लगाए जाने को भी चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी ब्याज दर को केवल “दंडात्मक” कहे जाने से वह अपने आप अवैध नहीं हो जाती. अदालत ने ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और भुगतान में चूक होने पर 11 प्रतिशत ब्याज की व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं किया.
आठ सप्ताह में बढ़ी राशि जमा करने का आदेश
हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी, लेकिन मुआवजे की राशि 7.07 लाख रुपये से बढ़ाकर 10.98 लाख रुपये कर दी. पहले से भुगतान किए गए 50 हजार रुपये और अदालत में जमा वैधानिक राशि, यदि कोई हो, को कुल मुआवजे में समायोजित किया जाएगा.
अदालत ने बीमा कंपनी को आठ सप्ताह के भीतर बढ़ी हुई राशि संबंधित ट्रिब्यूनल में जमा करने का निर्देश दिया. पूरी राशि चार दावेदारों के बीच बराबर बांटी जाएगी.
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