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रिम्स पर हाईकोर्ट का अल्टीमेटम, अब बस एक महीना बाकी - क्या समय पर होगा सुधार?

Ranchi: झारखंड के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मियों की भारी कमी, जरूरी मशीनों की खरीद में देरी और भवन निर्माण व मरम्मत जैसे अहम काम लंबे समय से अधूरे हैं. मेडिकल कैडर, सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर, नर्सिंग व क्लास-III और क्लास-IV पदों पर नियुक्ति के लिए पहले 1–2 महीने की समय सीमा तय थी, जिसे अब 3 से 6 महीने तक बढ़ाने का अनुरोध किया गया है. वहीं मशीनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया अभी भी जारी है और इसके लिए अतिरिक्त 6 महीने का समय मांगा गया है. 

 

भवन निर्माण/रिनोवेशन का काम JSBCCL के माध्यम से पूरा किया जाना है, जबकि जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए भी 6 महीने का समय मांगा गया है. इन्हीं मुद्दों को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 30 मई 2026 तक सभी प्रक्रियाएं पूरी करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा था कि अब तारीख पर तारीख नहीं चलेगी और तय समय सीमा में हर हाल में सुधार करना होगा.

 

मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने 18 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में यह अंतिम समय सीमा तय की थी. अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि इसके बाद किसी भी तरह की बहानेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी.

 

अदालत की फटकार भी कड़ी रही. 18 फरवरी 2026 को जारी आदेश संख्या 49 में कोर्ट ने कहा कि रिम्स प्रबंधन ने समय बढ़ाने के लिए जो आवेदन दिया, वह लापरवाही भरे तरीके से तैयार किया गया था. कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि आवेदन में यह तक स्पष्ट नहीं था कि अब तक क्या काम हुआ और ज्यादा समय क्यों चाहिए. अदालत ने यह भी कहा कि प्रबंधन ने मान लिया था कि समय विस्तार आसानी से मिल जाएगा. इसके बावजूद कोर्ट ने जनता के हित को देखते हुए अनिच्छा के साथ अंतिम मौका दिया.

 

कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2025 के अपने पुराने आदेश का हवाला देते हुए रिम्स को सात अहम काम पूरे करने का निर्देश दिया है. इसमें मेडिकल कैडर के खाली पदों पर नियुक्ति सबसे जरूरी है. इसके साथ ही सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर की बहाली भी पूरी करनी होगी.

 

नर्सिंग स्टाफ और ग्रेड तीन कर्मचारियों की नियुक्ति, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी दूर करना भी इस समय सीमा में शामिल है. इसके अलावा अस्पताल के लिए जरूरी मशीन और आधुनिक उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

 

भवनों के निर्माण और मरम्मत को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं. नए भवनों के निर्माण के लिए झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ तालमेल बनाकर काम करना होगा. साथ ही जर्जर भवनों की तत्काल मरम्मत करना अनिवार्य किया गया है.

 

इस बार हाईकोर्ट ने जिम्मेदारी भी तय कर दी है. रिम्स के निदेशक डॉ. राज कुमार को व्यक्तिगत रूप से इन सभी कार्यों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी बैठकें समय पर हों और भर्ती प्रक्रिया पूरी हो.

 

कोर्ट ने साफ कहा है कि अब प्रशासनिक जटिलता या प्रक्रिया का हवाला देकर देरी नहीं चलेगी. किसी और पर जिम्मेदारी डालकर बचने की भी अनुमति नहीं होगी. निदेशक को 10 मई 2026 तक शपथ पत्र के रूप में कोर्ट में प्रगति रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें हर काम की स्थिति बतानी होगी.

 

अब डेडलाइन में करीब एक महीना ही बचा है. सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या इतने कम समय में यह पूरी प्रक्रिया पूरी हो पाएगी. जिन कामों के लिए पहले ही महीनों का समय दिया गया था, वे अब तक पूरे नहीं हो सके हैं. हालांकि इस बार स्थिति अलग है क्योंकि कोर्ट ने इसे अंतिम मौका बताया है और सीधे कार्रवाई की चेतावनी दी है.

 

रिम्स में पहले अतिक्रमण हटाने जैसे काम तो तेजी से पूरे किए गए, लेकिन डॉक्टरों की भर्ती और मशीनों की खरीद जैसे जरूरी काम पीछे रह गए. ऐसे में अब 30 मई की डेडलाइन तय करेगी कि रिम्स की स्थिति सुधरती है या नहीं.

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