Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने जुबली देवी एवं अन्य की अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान लोक अदालत के आदेश का लंबे समय तक पालन नहीं करने पर सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई. खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि पहले भी सरकार की ओर से भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ.
यहां तक कि सचिव को शपथपत्र दाखिल करने के दिए गए निर्देशों की भी अवहेलना की गई. खंडपीठ ने उम्मीद जताई कि इस बार ऐसा नहीं होगा, विशेषकर तब जब स्वयं महाधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष आश्वासन दिया है. साथ ही सचिव को भी 10 जुलाई 2026 तक भुगतान में हुई देरी का कारण बताते हुए शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया. मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी.
खंडपीठ ने कहा कि यह मामला ऐसे निम्न वेतनभोगी कर्मचारियों से जुड़ा है, जिनके पक्ष में 13 जुलाई 2024 को लोक अदालत ने भुगतान का आदेश दिया था. इसके बावजूद लगभग दो वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें उनका वैध भुगतान नहीं किया गया.
सुनवाई के दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए थे. उन्होंने भुगतान में हुई देरी के लिए प्रशासनिक और विभागीय प्रक्रियाओं का हवाला दिया, लेकिन खंडपीठ ने उनके स्पष्टीकरण से असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वह इससे "बिल्कुल भी प्रभावित नहीं है."
खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2025 में लोक अदालत के पुरस्कार के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी, जो निर्धारित समय सीमा के काफी बाद दाखिल हुई थी. इस बीच किसी भी अदालत ने भुगतान पर रोक (स्टे) नहीं लगाई थी. इसके बावजूद केवल पुनर्विचार याचिका लंबित होने का बहाना बनाकर भुगतान नहीं किया गया. बाद में 6 फरवरी 2026 को वह पुनर्विचार याचिका भी सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दी गई.
इसके बाद कर्मचारियों ने आदेश के अनुपालन के लिए रिट याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया. हालांकि, अपील में L.P.A. No. 60 of 2026 में 13 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने लोक अदालत के आदेश को लागू करने और ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया. इसके बावजूद सरकार ने भुगतान नहीं किया.
खंडपीठ ने कहा कि जुलाई 2024 से अब तक भुगतान न करने का कोई उचित कारण सरकार नहीं बता सकी, क्योंकि किसी भी न्यायालय ने आदेश के क्रियान्वयन पर रोक नहीं लगाई थी.
महाधिवक्ता रोहित राय ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सभी मूल याचिकाकर्ताओं को 10 जुलाई 2026 तक भुगतान कर दिया जाएगा. इस पर खंडपीठ ने निर्देश दिया कि हर हाल में 10 जुलाई 2026 तक भुगतान किया जाए.
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