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HC ने विभागीय मामलों में बरी होने पर पुलिस अधिकारी को वर्ष 2018 से पदोन्नति देने का दिया आदेश

कोर्ट-कचहरी की खबरें
  • पदोन्नति न देने की कार्रवाई को कोर्ट ने कानून की दृष्टि से अवैध माना

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर हरिश कुमार पाठक की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उन्हें 13 एवं 16 जुलाई 2018 की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की तिथि से पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति दी जाए. साथ ही उन्हें उनके जूनियर अधिकारियों के समान सभी अनुषंगी (Consequential) लाभ भी प्रदान किए जाएं. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन एवं अधिवक्ता शिवानी भारद्वाज ने पक्ष रखा.

 

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने संबंधित अधिकारियों की पदोन्नति न देने की कार्रवाई को कानून की दृष्टि से अवैध माना. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 13 एवं 16 जुलाई 2018 की डीपीसी के आधार पर इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति दी जाए. उनके जूनियर अधिकारियों के समान सभी वेतन, वरिष्ठता एवं अन्य सेवा संबंधी लाभ भी दिए जाएं. यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जाए.


कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की पदोन्नति केवल लंबित विभागीय या आपराधिक कार्यवाही के कारण रोकी गई हो और बाद में वह उन आरोपों से दोषमुक्त हो जाए, तो उसे उसी तिथि से पदोन्नति का अधिकार मिलेगा, जिस दिन मूल डीपीसी हुई थी. यह कानून का स्थापित सिद्धांत है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध जिस आपराधिक मामले में 13 नवंबर 2022 को आरोपपत्र दाखिल हुआ, उसका वर्ष 2018 की डीपीसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि डीपीसी के समय ऐसा कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं था.


दरअसल, याचिकाकर्ता वर्ष 1991 से पुलिस सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. वर्ष 2018 में इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए हुई डीपीसी में उनका नाम शामिल था, लेकिन उस समय लंबित विभागीय कार्यवाहियों और दंड के आधार पर उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई. बाद में वर्ष 2020 की डीपीसी में उन्हें उपयुक्त पाया गया, फिर भी पदोन्नति नहीं मिली.

 

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने कोर्ट को बताया कि उनके विरुद्ध कुल छह विभागीय कार्यवाहियां चली थीं, जिनमें या तो उन्हें प्रारंभिक स्तर पर ही दोषमुक्त कर दिया गया या अपीलीय प्राधिकारी ने दंडादेश रद्द कर दिया. अंतिम आदेश से उन्हें 10 सितंबर 2021 को भी पूर्ण राहत मिल गई.


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