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हाईकोर्ट ने बैंक अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द की, दो वेतन वृद्धि रोकने की सजा दी

Ranchi News : अदालत ने कहा कि विभागीय जांच में अधिकारी के 26 जुलाई 2024 के पत्र को बिना शर्त आरोप स्वीकार करने वाला मान लिया गया, जबकि उसी पत्र में उन्होंने आरोपों की बुनियाद और अपनी गलत मंशा से इनकार किया था. ऐसे में केवल उस पत्र के आधार पर पूरी विभागीय जांच समाप्त करना कानूनन उचित नहीं था.
 
झारखंड हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी राज कुमार को राहत देते हुए सेवा से हटाने के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने बर्खास्तगी की सजा को बदलते हुए दो वार्षिक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने का आदेश दिया. साथ ही बैंक को अधिकारी को तत्काल सेवा में बहाल करने और परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया है. हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने यह फैसला सुनाया.

 

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अदालत ने कहा कि विभागीय जांच में अधिकारी के 26 जुलाई 2024 के पत्र को बिना शर्त आरोप स्वीकार करने वाला मान लिया गया, जबकि उसी पत्र में उन्होंने आरोपों की बुनियाद और अपनी गलत मंशा से इनकार किया था. ऐसे में केवल उस पत्र के आधार पर पूरी विभागीय जांच समाप्त करना कानूनन उचित नहीं था.

 

राज कुमार मई 2009 में बैंक ऑफ इंडिया में प्रोविजनल ऑफिसर के रूप में नियुक्त हुए थे. वे बोकारो स्थित सेंट जेवियर्स स्कूल शाखा में 5 जून 2017 से 10 अगस्त 2020 तक सीनियर ब्रांच मैनेजर रहे थे. बैंक ने 23 अप्रैल 2024 को उन्हें पांच आरोपों का आरोप पत्र दिया था.

 

इनमें बैंक के नियमों का उल्लंघन कर ऋण स्वीकृत करने, ऋण की निगरानी नहीं करने, पत्नी से जुड़े प्रोजेक्ट में हाउसिंग लोन स्वीकृत करने और कुछ ऋण खातों में कथित तौर पर अनुचित सुविधा देने के आरोप शामिल थे.

 

विभागीय कार्यवाही के दौरान 26 जुलाई 2024 को अधिकारी से पूछा गया कि वे आरोप स्वीकार करते हैं या इनकार. उन्होंने पत्र देकर आरोप स्वीकार करने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ऋण वास्तविक थे, उन्हें व्यक्तिगत लाभ नहीं मिला और किसी तरह की दुर्भावना साबित नहीं हुई है. उन्होंने प्रबंधन से नरम रुख अपनाने का अनुरोध भी किया था.

 

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोप की स्वीकारोक्ति स्पष्ट, विशिष्ट, बिना शर्त और निर्विवाद होनी चाहिए. अदालत ने पाया कि अधिकारी के पत्र में आरोपों के मूल आधार और कथित निजी लाभ से इनकार किया गया था. इसके बावजूद उसी दिन बिना किसी गवाह के बयान, दस्तावेजों के औपचारिक प्रमाण और जिरह का अवसर दिए जांच पूरी कर आरोप सिद्ध मान लिए गए.


अदालत ने कहा कि सेवा से हटाना उपलब्ध सबसे कठोर दंडों में से एक है और मौजूदा परिस्थितियों में यह सजा अत्यधिक कठोर एवं असंगत है. इसलिए 4 अक्टूबर 2024 का बर्खास्तगी आदेश और 20 जनवरी 2025 का अपीलीय आदेश रद्द किया जाता है.

 

हाईकोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि राज कुमार को तत्काल सेवा में बहाल किया जाए और संशोधित दंड के अनुसार परिणामी लाभ दिए जाएं. पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने के आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है.

 

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