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हाईकोर्ट ने शिक्षिका की सेवा समाप्ति का आदेश किया रद्द, पुनर्बहाली का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने शिक्षिका को राहत प्रदान की है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने शिक्षिका अबेदा खातून के पक्ष में फैसला देते हुए उनकी सेवा समाप्ति को अवैध करार दिया और पुनर्बहाली का आदेश दिया है. उनके मैट्रिक एडमिट कार्ड और मैट्रिक प्रमाणपत्र में जन्मतिथि अलग-अलग होने के कारण विद्यालय प्रबंधन ने 18 अप्रैल 2019 को उनकी सेवा समाप्त कर दी थी.
 

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने शिक्षिका को राहत प्रदान की है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने शिक्षिका अबेदा खातून के पक्ष में फैसला देते हुए उनकी सेवा समाप्ति को अवैध करार दिया और पुनर्बहाली का आदेश दिया है. उनके मैट्रिक एडमिट कार्ड और मैट्रिक प्रमाणपत्र में जन्मतिथि अलग-अलग होने के कारण विद्यालय प्रबंधन ने 18 अप्रैल 2019 को उनकी सेवा समाप्त कर दी थी. जिसे अबेदा खातून ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह और अधिवक्ता सैफ अली खान ने पक्ष रखा था. 

 

याचिकाकर्ता अबेदा खातून वर्ष 2010 से राईन उर्दू गल्स मिडिल स्कूल में सहायक शिक्षिका (अंग्रेजी) के पद पर कार्यरत थीं. उनके मैट्रिक एडमिट कार्ड और मैट्रिक प्रमाणपत्र में जन्मतिथि अलग-अलग होने के कारण विद्यालय प्रबंधन ने 18 अप्रैल 2019 को उनकी सेवा समाप्त कर दी थी. विद्यालय ने इस संबंध में बिहार स्कूल एग्जामिशन बोर्ड से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन समय पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिलने के कारण यह कार्रवाई की गई थी. बाद में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने न्यायालय में स्पष्ट किया कि था कि याचिकाकर्ता के पास मौजूद मैट्रिक प्रमाणपत्र की जन्मतिथि उनके मूल अभिलेखों से पूरी तरह मेल खाती है और वही सही है. 

 

मामले में कोर्ट ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन ने बिना उचित अवसर दिए सेवा समाप्ति का आदेश पारित किया. जब परीक्षा बोर्ड ने प्रमाणपत्र को सत्य एवं प्रमाणिक माना है, तब केवल एडमिट कार्ड में भिन्न जन्मतिथि के आधार पर सेवा समाप्ति उचित नहीं है. कोर्ट ने विद्यालय प्रबंधन के 18.04.2019 का सेवा समाप्ति आदेश को रद्द कर दिया.

 

विद्यालय प्रबंधन को दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को पुनः सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है. साथ ही मैट्रिक प्रमाणपत्र में अंकित जन्मतिथि को मानते हुए उनकी सेवा संबंधी अभिलेखों को ठीक करने का आदेश दिया. विद्यालय प्रबंधन को वेतन निर्धारण के लिए राज्य सरकार को अनुशंसा भेजने का निर्देश दिया. राज्य सरकार को नियमों के अनुसार वेतन निर्धारण एवं अन्य परिणामी लाभ (Consequential Benefits) 12 सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया गया.

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