Ranchi: झारखंड हाई कोर्ट ने सेवा नियमितीकरण से जुड़े एक मामले में याचिकाकर्ता रोशन दास की रिट याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 का राज्य स्तरीय समिति का आदेश रद्द कर दिया. कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता की जीप चालक के पद पर सेवा 8 सप्ताह के भीतर नियमित की जाए.
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दरअसल, याचिकाकर्ता रोशन दास जुलाई 2009 से जामताड़ा कल्याण विभाग में जीप चालक के रूप में दैनिक वेतनभोगी आधार पर स्वीकृत रिक्त पद पर कार्यरत थे. उन्होंने वर्ष 2019 में नियमितीकरण का आवेदन दिया, जिसे जिला एवं प्रमंडलीय नियमितीकरण समितियों ने अनुशंसित किया था. राज्य स्तरीय समिति ने 15 दिसंबर 2025 को नियमितीकरण अस्वीकार कर दिया.
इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने यह रिट याचिका दायर की थी. राज्य सरकार द्वारा याचिकाकर्ता के नियमितीकरण अस्वीकार करने के कारण बताये, जिसमें बताया गया कि रोशन दास की नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं हुई थी. 20 जून 2019 तक उनकी 10 वर्ष की सेवा पूरी नहीं हुई थी. याचिकाकर्ता रोशन दास मैट्रिक पास नहीं थे. चालक की नियुक्ति JSSC के माध्यम से होनी चाहिए थी.
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति स्वीकृत रिक्त पद पर विभागीय आदेश के आधार पर हुई थी तथा विभाग स्वयं वर्षों से उनका वेतन देता रहा. इसलिए सरकार यह नहीं कह सकती कि नियुक्ति पूरी तरह अवैध थी. याचिकाकर्ता लगातार 01 जुलाई 2009 से कार्यरत हैं. केवल 20 जुन 2019 की कट-ऑफ तिथि के आधार पर नियमितीकरण से वंचित करना उचित नहीं है. राज्य समिति का यह निष्कर्ष कि याचिकाकर्ता मैट्रिक नहीं हैं, तथ्यात्मक रूप से गलत पाया गया क्योंकि उन्होंने 2017 में मैट्रिक उत्तीर्ण कर लिया था.
JSSC द्वारा उस समय तक जीप चालक पद के लिए कोई भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की गई थी. इसलिए यह आधार भी असंगत माना गया.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि यदि नियुक्ति अवैध नहीं बल्कि केवल अनियमित है और कर्मचारी लंबे समय से स्वीकृत पद पर कार्य कर रहा है, तो उसके नियमितीकरण पर न्यायसंगत एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए.
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