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CISF में असिस्टेंट कमांडेंट के विज्ञापन पर रोक लगाने से हाईकोर्ट का इनकार

  • कोर्ट ने कहा-इस केस के अंतिम निर्णय से नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होगी

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट में सीआईएसफ असिस्टेंट कमांडेंट रिक्रूटमेंट रूल 2009 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. प्रार्थी के हस्तक्षेप याचिका (आईए) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यूपीएससी द्वारा जारी सीआईएफएफ में असिस्टेंट कमांडेंट नियुक्ति विज्ञापन संख्या 8/26 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. 

 

लेकिन कोर्ट यह निर्देश दिया कि असिस्टेंट कमांडेंट की विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति इस केस के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगी. इसकी जानकारी अभ्यर्थियों को भी दे दी जाए. 

 

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प्रार्थी ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस केस के लंबित रहने के दौरान ही यूपीएससी ने असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए विज्ञापन निकाला है, इसलिए इस पर रोक लगाई जाए. प्रार्थी ने सीआईएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट रिक्रूटमेंट रूल 2009 को चुनौती देते हुए कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेंनिंग की गाइडलाइन के तहत हर 5 साल में इस नियुक्ति रूल का रिव्यू होना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं किया गया.

 

प्रार्थी का यह भी कहना था कि सीआईएसएफ के अन्य विंग  में असिस्टेंट कमांडेंट के 100 प्रतिशत पद इंस्पेक्टर पद से प्रमोशन के माध्यम से भरे जाते हैं. जबकि उक्त रूल के तहत केवल 30% पद ही इंस्पेक्टर पद से असिस्टेंट कमांडेंट पद पर प्रमोशन देने का प्रावधान है. इसलिए वर्ष 2009 की नियुक्ति नियमावली और असंवैधानिक और गलत है.

 

प्रार्थी का कहना था कि मात्र 30 प्रतिशत पद पर ही प्रमोशन से भरने से इंस्पेक्टर पद पर कई लोग करीब 20 साल से पड़े हुए हैं. उन्हें असिस्टेंट कमांडेंट पद पर प्रमोशन नहीं मिला है. मामले में मनोहर बरुआ ने हाईकोर्ट याचिका दाखिल की है. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई.

 

 

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