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हाईकोर्ट ने माओवादी संगठन से जुड़े आरोपी की जमानत याचिका की खारिज

  • 1999 से माओवादी संगठन का सहयोगी रहा है आरोपी
  • ट्रायल को यथासंभव तेजी से आगे बढ़ाया जाए

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन CPI (माओवादी) से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी प्रभु प्रसाद साहू उर्फ प्रभु साहू की जमानत याचिका खारिज कर दी है.

 

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले में फैसला सुनाया है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया.

 

हालांकि अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई (ट्रायल) को यथासंभव तेजी से आगे बढ़ाया जाए. 

 

निचली अदालत के आदेश को दी थी चुनौती

दरअसल, आरोपी ने प्रभु प्रसाद साहू ने विशेष एनआईए न्यायालय, रांची में जमानत याचिक दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया था.

 

इसके बाद 26 नवंबर 2025 को उसने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी.

 

यह मामला गारू थाना कांड संख्या 32/2017 से संबंधित है, जिसकी जांच बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी.  

 

क्या है मामला 

अभियोजन के अनुसार, 31 अगस्त 2017 को पुलिस को सूचना मिली थी कि प्रभु साहू माओवादी संगठन के केंद्रीय कमेटी सदस्य सुधाकरन का समर्थक है और वह माओवादियों को हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री तथा अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराता था.

 

आरोपी की निशानदेही पर रुद जंगल क्षेत्र से 7.62 एमएम की 13 जिंदा गोलियां, माओवादी साहित्य और अन्य सामग्री बरामद की गई थी. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था. 

 

1999 से माओवादी संगठन का सहयोगी रहा है आरोपी 

जांच के दौरान एनआईए ने आरोप लगाया कि आरोपी वर्ष 1999 से माओवादी संगठन का सहयोगी रहा है और उसने संगठन के कई शीर्ष सदस्यों के लिए हथियार, राशन, कपड़े, परिवहन और ठिकाने की व्यवस्था की. साथ ही ठेकेदारों से लेवी वसूली कर संगठन को आर्थिक सहायता भी पहुंचाई.

 

अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह 1 सितंबर 2017 से जेल में बंद है और अभी तक एक भी गवाह का बयान नहीं हुआ है, जिससे मुकदमे में अत्यधिक देरी हो रही है.

 

वहीं एनआईए के विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की रिहाई से साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा है. 

 

 

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