- हत्या के प्रयास मामले में दोषियों की सजा बरकरार
- हाईकोर्ट ने अपील की खारिज
- घायल प्रत्यक्षदर्शी की गवाही को कानून में विशेष महत्व दिया जाता
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने हत्या के प्रयास और लूट के एक पुराने मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दो दोषियों की अपील खारिज कर दी है.
हाईकोर्ट ने कहा कि घायल प्रत्यक्षदर्शी की गवाही विश्वसनीय है और इसे खारिज करने का कोई ठोस कारण नहीं है. कहा कि घायल प्रत्यक्षदर्शी की गवाही को कानून में विशेष महत्व दिया जाता है.
उसके बयान में कोई ऐसा गंभीर विरोधाभास नहीं मिला, जिससे अभियोजन की कहानी पर संदेह हो. मेडिकल साक्ष्य भी उसके बयान का समर्थन करते हैं.
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दो माह में ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर काटनी होगी बाकी सजा
खंडपीठ ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए कहा कि दोनों आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं, इसलिए उनकी जमानत रद्द की जाती है. उन्हें दो महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर बाकी सजा काटनी होगी.
यदि वे निर्धारित समय में पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने हरिहर ठाकुर और अर्जुन ठाकुर की क्रिमिनल अपील (एसजे) पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया.
पाकुड़ की अदालत ने सुनाई थी सजा
पाकुड़ के सत्र न्यायालय ने उक्त दोनों आरोपियों को आईपीसी की धारा 307/34, 397 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष, 7 वर्ष और 3 वर्ष की सजा सुनाई थी, जो साथ-साथ चलने वाली थी.
जानें क्या था मामला
दरअसल 15 दिसंबर 2000 की शाम करीब 6 बजे उमाकांत साह अपनी नई राजदूत मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे. त्रिकोणी नदी के पास सड़क पर खड़े हरिहर ठाकुर, अर्जुन ठाकुर और एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें रोक लिया.
आरोप है कि हरिहर ठाकुर के कहने पर अर्जुन ठाकुर ने पिस्तौल से गोली चलाई, जो उमाकांत साह की पीठ में लगी और पेट से निकल गई. इसके बाद आरोपियों ने चाकू से कई वार किए और उनकी मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गए.
घायल को इलाज के लिए हिरणपुर के एक अस्पताल और बाद में कोलकाता के अस्पताल ले जाया गया.
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