Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने कल्याण विभाग के 13 चतुर्थ श्रेणी (वर्ग-IV) कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनका प्रमोशन अस्वीकार करने वाला सरकारी आदेश रद्द कर दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने सरकार को आठ सप्ताह के भीतर प्रमोशन का औपचारिक आदेश जारी करने का निर्देश दिया.
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रामावतार सिंह मुंडा व अन्य 13 याचिकाकर्ताओं ने 30.10.2020 के उस आदेश (मेमो संख्या 2147) को चुनौती दी थी, जिसमें उनका प्रतिनिधित्व खारिज कर दिया गया था. विभाग का तर्क था कि वर्ग-IV से वर्ग-III में प्रमोशन के लिए "सीमित प्रतियोगिता परीक्षा" की अधियाचना (requisition) कर्मचारी चयन आयोग को भेजी जा चुकी है, इसलिए कर्मचारी आयोग के विज्ञापन के आधार पर आवेदन करें.
याचिकाकर्ताओं की दलील
वर्ष 2012 (मेमो संख्या 2667, दिनांक 10.11.2012) में कल्याण विभाग ने समान योग्यता वाले वर्ग-IV कर्मियों को बिना परीक्षा के वर्ग-III में प्रमोशन दिया था.
टाइपिस्ट, आवासीय विद्यालयों और प्रखंड कल्याण कार्यालयों में कई पद रिक्त हैं. इससे पहले 2018 में भी वे हाईकोर्ट गए थे, जहां उन्हें नया प्रतिनिधित्व देने का निर्देश मिला था.
कोर्ट की टिप्पणियां
नियम 2010 में बन गया था, लेकिन आज तक कोई परीक्षा नहीं हुई. परीक्षा की रूपरेखा (modalities) भी पहली बार 17.03.2026 को लाई गई.
2019 में अधियाचना भेजे जाने के बावजूद परीक्षा न होना, प्रमोशन से इनकार का आधार नहीं हो सकता.
सरकार के वकील समानता (parity) के तथ्य से इनकार नहीं कर सके. कोर्ट ने कहा कि जब उसी विभाग में समान स्थिति वाले कर्मियों को बिना परीक्षा प्रमोशन मिला, तो याचिकाकर्ताओं को वंचित रखने का कोई औचित्य नहीं.
कोर्ट ने 30.10.2020 के आदेश को निरस्त कर दिया. कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद, यदि याचिकाकर्ता अन्यथा पात्र हैं, तो परीक्षा पास करने की शर्त को छोड़कर, आठ सप्ताह में प्रमोशन का औपचारिक आदेश जारी हो. कोर्ट ने रिट याचिका को स्वीकार कर लिया.
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