- सरकार का दावा, साहिबगंज में पाइपलाइन से जलापूर्ति योजना का काम पूरा कर लिया गया है
- 21 वार्ड पार्षदों ने कहा- जलापूर्ति योजना अब तक पूरी नहीं हुई
Ranchi : साहिबगंज की लगभग 70 करोड़ रुपये की पेयजल योजना से संबंधित जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई की. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में राज्य सरकार के रवैया पर कड़ी नाराजगी जताई है. खंडपीठ ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अपर मुख्य सचिव को स्वयं साहिबगंज जाकर योजना का निरीक्षण करने और 24 जुलाई तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
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कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह जिम्मेदारी किसी दूसरे अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकती. सरकार की ओर से बताया गया कि कोर्ट के 10 मार्च 2026 के आदेश के बाद पाइपलाइन से जलापूर्ति योजना का काम पूरा कर लिया गया है और पाइपलाइन में रिसाव की समस्या भी अदालत द्वारा दिए गए अतिरिक्त 45 दिनों के भीतर दूर कर ली गई है.
मामले में खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार इस योजना पर करीब 70 करोड़ रुपये या उससे अधिक की सार्वजनिक धनराशि खर्च कर चुकी है. ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही या अक्षमता के कारण जनता का पैसा पानी में नहीं बहने दिया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि इस योजना का वास्तविक उद्देश्य साहिबगंज के लोगों को घर-घर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है.
इससे पहले सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सरकार के इस दावे को सही नहीं बताया गया. साहिबगंज नगर परिषद के 28 में से 21 वार्ड पार्षदों के बयान भी अदालत में प्रस्तुत किए गए, जिसमें कहा गया है कि साहिबगंज पाइपलाइन जलापूर्ति योजना अब तक पूरी नहीं हुई है. कई जगह पाइपलाइन से पानी का रिसाव जारी है और अब तक लोगों को नल कनेक्शन भी नहीं दिए गए हैं.
दोनों पक्षों की विरोधाभासी बातें सुनने के बाद कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव को इंजीनियर-इन-चीफ, नगर परिषद की अध्यक्ष और जरूरत पड़ने पर अन्य अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण करने का आदेश दिया. निरीक्षण के दौरान याचिकाकर्ता के प्रतिनिधि को भी मौजूद रहने की अनुमति देने को कहा गया है. मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को होगी.
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