- LRDC ने बताया, प्रार्थी व प्रतिवादी दोनों एक ही जमीन पर कर रहे दावा
- एलआरडीसी, रांची कोर्ट में हुए हाजिर
Ranchi: हरमू की एक विवादित जमीन से जुड़े मामले में एलआरडीसी रांची कोर्ट के आदेश के आलोक में झारखंड हाईकोर्ट में हाजिर हुए. एलआरडीसी ने खुद को बताया कि प्रार्थी और प्रतिवादी दोनों एक ही जमीन पर दावा कर रहे हैं. जिस पर कोर्ट ने उनसे पूछा कि क्या आपने उक्त जमीन का स्थल निरीक्षण किया है, जिसपर एलआरडीसी ने कहा कि उन्होंने सफल जांच की है.
उसके बाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की कोर्ट में मामले की सुनवाई 16 जून निर्धारित करते हुए एलआरडीसी को स्थल जांच की रिपोर्ट शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने एलआरडीसी को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने से छूट प्रदान की.
दरअसल, प्रार्थी जितेश कुमार सोनी एवं नितेश कुमार सोनी ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट दाखिल कर कहा है कि पुलिस, सर्किल ऑफिसर की मिलीभगत से उनकी जमीन पर प्रतिवादी (महेंद्र सोनी एवं अमित कुमार) को कब्जा दिला दिया गया.
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रतिवादियों ने सर्किल ऑफिसर, अरगोड़ा और पुलिस की मिलीभगत से प्रार्थी की जमीन का म्यूटेशन रद्द कर दिया है. म्यूटेशन रद्द के खिलाफ प्रार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. जिसमें कोर्ट ने रांची डीसी को विवादित जमीन की नापी कर रिपोर्ट देने को कहा था.
मामले में एलआरडीसी ने भूमि नापी से संबंधित रिपोर्ट शपथ पत्र के माध्यम से हाईकोर्ट में दाखिल की थी. इसमें कहा गया था कि यह विवादित जमीन कहां है उसे चिन्हित (आईडेंटिफिकेशन) नहीं किया जा सकता.
प्रार्थी की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि जितेश कुमार सोनी एवं नितेश कुमार सोनी ने साकेत नगर, ग्राम अरगोड़ा, वार्ड नंबर 25 में 6.25 डिसमिल जमीन ली है. जिस पर प्रतिवादी महेंद्र सोनी एवं अमित कुमार अपना दावा कर रहे हैं. जबकि प्रार्थी और प्रतिवादी दोनों की जमीन की चौहद्दी अलग-अलग है.
प्रार्थी की जमीन पर एक बार तोड़फोड़ की घटना भी हुई थी जिसे लेकर दोनों पक्ष की ओर से अरगोड़ा थाना में फरवरी 2023 में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हुई थी. जिसमें अनुसंधानकर्ता ने प्रतिवादी महेंद्र सोनी और अमित कुमार के केस को झूठा बताते हुए अदालत में फाइनल फार्म दाखिल कर दिया था. लेकिन मामले के अनुसंधानकर्ता के बदलने के बाद अदालत से अनुमति लेकर प्रतिवादी महेंद्र सोनी एवं अमित कुमार की ओर से दर्ज कराए गए केस में नए सिरे से अनुसंधान शुरू किया गया.
इसके बाद प्रार्थी द्वारा दर्ज कराए गए केस में महेंद्र और अमित के पक्ष में निर्णय देते हुए फाइनल फार्म दाखिल कर दिया गया था. बाद में पुलिस की सांठ-गांठ से प्रार्थी की जमीन पर प्रतिवादी महेंद्र और अमित को कब्जा दिलाया गया.
इसके बाद सर्किल ऑफिसर की मदद से प्रार्थी के जमीन का म्यूटेशन भी रद्द करवा दिया गया. जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. जिसमें कोर्ट ने डीसी से रिपोर्ट मांगी थी और मामले में एलआरडीसी ने शपथ पत्र दायर किया था.
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