Ranchi/Garhwa News: श्री बंशीधर नगर स्थित ऐतिहासिक राजा पहाड़ी शिव मंदिर के प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों से कड़े सवाल किए. सुनवाई में गढ़वा उपायुक्त और श्री बंशीधर नगर के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए.
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मामला मंदिर के प्रशासनिक नियंत्रण और वहां कार्यरत पुजारी के सामान को SDO द्वारा बाहर निकाले जाने तथा जब्त किए जाने से जुड़ा है. मंदिर के संचालन और रखरखाव के लिए लंबे समय से एक निबंधित ट्रस्ट कार्यरत है. ट्रस्ट के सदस्यों का आरोप है कि कुछ स्थानीय लोगों की शिकायत के आधार पर SDO ने ट्रस्ट को दरकिनार करते हुए प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप किया और एक नई कमेटी का गठन कर उसमें स्वयं सचिव का पद भी संभाल लिया.
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इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए निबंधित ट्रस्ट के सदस्यों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था. ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा.
सुनवाई के दौरान जस्टिस आनंद सेन ने ऑनलाइन उपस्थित DC और SDO से सीधे सवाल किया कि आखिर किस कानून के तहत एक वैधानिक और निबंधित ट्रस्ट को समाप्त कर नई कमेटी गठित की जा सकती है. अदालत ने पूछा कि प्रशासन को ऐसा करने का अधिकार किस कानून से मिला है.
अदालत के सवालों पर SDO संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वा उपायुक्त ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई क्षेत्राधिकार से बाहर थी और इसमें गलती हुई है.
सुनवाई के दौरान उपायुक्त की ओर से गलत आदेश को निरस्त करने और पूर्व की स्थिति बहाल करने का मौखिक एवं लिखित आश्वासन दिया गया. इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित की है.
राजा पहाड़ी शिव मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की करीब 100 वर्षों की आस्था और प्रयासों का प्रतीक माना जाता है. हाईकोर्ट के आज के रुख और जिला प्रशासन द्वारा अपनी गलती स्वीकार किए जाने के बाद निबंधित ट्रस्ट के सदस्यों में उम्मीद जगी है कि उन्हें मंदिर के प्रशासनिक अधिकार वापस मिल सकते हैं.
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